Tuesday, 12 September 2023

संसार की कामना करने वाला पूर्ण नास्तिक है | वन परसेन्ट नहीं , पूर्ण नास्तिक है वह कभी आस्तिक नही हो सकता |

संसार की कामना करने वाला पूर्ण नास्तिक है | वन परसेन्ट नहीं , पूर्ण नास्तिक है वह कभी आस्तिक नही हो सकता | 
जब तक संसार की कामना अपने मस्तिष्क में रखकर और मन्दिरों में जायेगा , संन्तो के पास जायेगा , भगवान् से कामना करके , याचना करके , मानता करके , नाटक करेगा ये सब , तब तक वो आस्तिक नही हो सकता |
आस्तिक की पहली परिभाषा है कि भगवान् में आनन्द है , संसार में नहीं है | ये बात मान ले | और ये बात मान लिया तो संसार की कामना कभी नहीं करेगा |
नम्बर दो , अरे भई तुम ये जानते हो कि भगवान् सर्वज्ञ है | हाँ , हाँ गधा भी जानता है ये कौन नही जानता | 
तो क्यों जी संसार में कोई किसी से कुछ माँगता है इसलिये कि वह जिसे माँगना है वह सर्वज्ञ नही है |
इसलिये उससे लोग माँगते हैं | अरे भई हमको दे देना
दरी, हमको दे देना टोपी , हमको दे देना रुपया , हमको दे देना अमुक चीज | 
जब भगवान् सर्वज्ञ हैं फिर माँगते क्यों हो ?
इसका मतलब हैं तुम भगवान को ये समझते हो कि उनको पता नहीं है मैं जो माँगना चाहता हूँ | मैं बता दूँ उनको | 
नम्बर तीन , ये बताओ जब तुमको ये पता नहीं है कि कौन चीज अच्छी है कौन बुरी है तो फिर तुम माँगने क्यों चले ?
भगवान् के यहाँ क्या - क्या सामान है उनकी दुकान में पता है?
अजी भगवान् को हम जानते ही नहीं हैं उनकी दुकान में क्या - क्या है, क्या पता है ? तो फिर तुम क्या मांगोगे छोटा सा बच्चा क्या मांगता है ?
खिलौना टॉफी | बस उसकी दुनिया उतनी बड़ी है|
तुम जिस मल मूत्र के पिटारे में पले हो और जिस विषय विष्ठा में तुम मर रहे हो अनादिकाल से वही माँगोगे | 
  तो हम लोग अगर अपनी बुद्धि लगाकर माँगेंगे तो क्या माँगेगे ?
जहां हमारा अटैचमेंट है वही मांग लेंगें | उससे अधिक हम कुछ जानते ही नहीं |
क्योंकि अगर जानते तो फिर संसार में अटैचमेंट ही क्यों होता , बड़ी सीधी सी बात है |

नम्बर चार, एक बात सोंचो कि प्रारब्ध सबको भोगना पड़ेगा | जी हाँ | ज्ञानी को भी ? जी हाँ |
बड़े से बड़े तुम बुद्धिमान हो , लेकिन अगर तुमको अरबपति होना नही लिखा है , तुम्हारे भाग्य में तो कोई नही बना सकता | 
अरब रुप्या पड़ा हुआ तुमको मिल जाय और तुम कहो मैं बन गया , तो तुरन्त रिवाल्वर दिखा देगा एक आदमी छीन लेगा | आया हुआ चला जाएगा |
प्रारब्ध में वो शक्ति है |
तो प्रारब्ध मिटाने की शक्ति परमहंसो मे नही है जो मायातीत हो चुके है उनको भी प्रारब्ध भोगना पड़ता है | यहाँ तक कानून कायदा है |
अरे जिसके मामा भगवान श्री कृष्ण , पिता अर्जुन सरीखा गीता ज्ञानी महापुरुष , ब्याह कराने वाले वेदव्यास भगवान् के अवतार वो उत्तरा विधवा हो गई , अभिमन्यु मारा गया |
और सब बैठ कर शोक मना रहें हैं |
श्री कृष्ण भी बैठे हैं , अर्जुन भी बैठा हैं |
कोई नही बुला पा रहा है, 
अर्जुन रो रहा है मेरे बेटे से मिला दो , भगवान् ने कहा अरे भई ये सब प्रारब्ध के मामले हैं 
:- " श्री कृपालु जी माहाराज ( कामना और उपासना , भाग - ||)

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