Saturday, 6 March 2021

मनुष्य की जिंदगी में 99% चुनौतियां

मनुष्य की जिंदगी में 99% चुनौतियां मनुष्यों के द्वारा हीं निर्मित और मनुष्य के खुद के द्वारा ही समाधानकृत होती हैं ।
चाहे कोई विमारी हीं क्यों नहीं हो या घटना दुर्घटना क्यों नहीं हो । व्यक्ति के खुद का रहन-सहन , खान-पान , आचार-विचार , साधन-वाणी और व्यवहार व्यक्ति के लिए चुनौतियां बन जाती है ।
प्रकृति प्रदत्त चुनौतियां तो हमेंशा पूर्व जन्म के किए कर्मों का लेखा जोखा है । परिणाम है ।
हलांकि प्रकृति प्रदत्त आपदा विनाशकारी  तो होती है, वहीं निर्माणकारी भी होती है । 
हालांकि प्रकृति प्रदत्त आपदा भी आज के युग में सामुहिक मानव जाति की भोग कामना का परिणाम है । 
प्रकृति अपने वैलेंश व्यवस्था के परिणामस्वरूप ही रंग बदलती है जो भयावह और सामूहिक नर- जीव- जन्तु संहार का कारक बनती । 
फिर मनुष्य वेचारा ईश्वर को जिम्मेदार मानता है ।
और याचना करता है - रक्षाम रक्षाम रक्षाम ।
पर कैसे मिले रक्षा । 
भक्षक रूपी दैत्य व्यवहार करने पर तो केवल दानविए संहार का हीं भागीदार वनेंगें हम ।
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां मिलेगा ।
अत: हमें ईश्वरीय- सत्ता का सम्मान करना चाहिए और ईश्वर से , सद्गूरूदेव से प्यार करना चाहिए ।
भोगवादी ना होकर भक्तिवादि होना चाहिए , योगवादि होना चाहिए , खुद को गुरूदेव से योगित होना चाहिए हमेंशा। ध्यान रहे ईश्वर के पास हमारे प्रत्येक कर्मो का लेखा जोखा है जो हमारा प्रारब्ध है । हमें लगता है भ्रमवश , अज्ञानवश की फलाने ने हमें दु:ख दिया किन्तु वास्तव में हमारे दु:ख का कारण हम स्वयं हैं अन्य कतई नहीं !
- संजीव कुमार ।

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