Wednesday, 24 March 2021

भगवान मनुष्य के आत्मा के साथ सायुज्य सखा के रूप में ह्रदय मे़ सदा विद्दमान रहते़ हैं।

एगारहवां प्रश्न - भगवान मनुष्य के आत्मा के साथ सायुज्य सखा के रूप में ह्रदय मे़ सदा विद्दमान रहते़ हैं। और मनुष्य के मन में उठे संकल्पों को नोट करतें हैं और फल देतें हैं । दो काम करतें हैं । तो भगवान जब अन्य भोग योनि के जीव के कर्मों को नोट नहीं करतें हैं तो वो अन्य भोग योनि के जीवात्मा के साथ रहकर क्या करतें हैं ?

उत्तर - बड़ा सुन्दर प्रश्न है ।
भगवान सभी जीवात्मा के सायुज्य सखा के रूप में उसके ह्रदय में निराकार रूप में सदा रहते हैं, कभी अकेला नहीं छोड़ते हैं और जीव जहां जहां जिस जिस योनि में जाता है भगवान भी उसके साथ जाते हैं । 
अब भगवान अपनी जीव शक्ति मनुष्य के लिए दो नहीं तीन काम करतें हैं ।
पहला - भगवान महाचेतन है वो मनुष्य के ह्रदय में अपने अंश जीवात्मा के साथ रहकर जीवन शक्ति प्रदान करते रहते हैं । दुसरे शब्दों में भगवान जीव को चेतन बनाए रखने का काम करते हैं । और शक्ति प्रदान करतें हैं ।
यहीं पहला काम वो भोग योनि के जीवों के लिए भी करतें हैं ।
नहीं तो कोई भी जीव चेतन नहीं रह सकता कभी ।
इस लिए अन्य भोग योनी में भगवान केवल यही पहला काम करते हैं अन्य दो काम नहीं करते , लेकिन केवल मनुष्य जो की कर्मप्रधान योनि है में दो काम और करतें हैं जो निम्नलिखित हैं ।

दुसरा - मानव के मन में उठे संकल्पों को नोट करना ।

और तीसरा काम - उस मन में उठे संकल्पों के आधार पर फल प्रदान करना । 
इस प्रकार भगवान मानव के ह्रदय में निवास करके उपर वाले तीनों काम करतें हैं ।
लेकिन भोग योनि के सभी जीवों में केवल उपर का पहला काम करते हैं अन्य दो काम नहीं करतें हैं ।

 इसलिए केवल और केवल मानव योनि एक मात्र अति उत्तम योनि हैं । केवल मनुष्य पुरूषार्थ करके , गुरू की शरणागति करके भगवान के नीज धाम को प्राप्त करके सदा के लिए आनंदमय हो सकता हैं । इसलिए मनुष्य योनि को गंवाना एक महान भूल है । इसिलिए देवता भी मानुष तन प्राप्त करने के लिए सदा लालायित रहते हैं। 

श्री राधे ।

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