उत्तर - हंस और परमहंस एक विशिष्ट अवस्था का नाम है ।
हंस - एक दिव्य महापुरूष के सानिध्य में उनके द्वारा बताए साधन भक्ति द्वारा एक जीव जब ज्ञान , वैराग्य प्राप्त करके संसार से अनासक्त हो जाता है तो हंसा अवस्था प्राप्त कर लेता है ऐसे साधन सिद्ध जीव को हंस कहतें हैं - जैसे स्वामी विवेकानंद , योगदानंद , युक्तेस्वरानंद आदि । ये जीव साधन सिद्ध होतें हैं। ये भगवान श्रीकृष्ण के जीवशक्ति के अंश होतें हैं । और ये जीव ध्यान , समाधी द्वारा भगवद् दर्शन करते हैं ।
परमहंस - बहुत उच्च कोटी के समाधी के अवस्था का नाम है । जो जीव नित्य सिद्ध होते है और संसार से सदा से अनासक्त होते हैं , हर समय समाधी की अवस्था में रहतें हैं, बहुत थोड़े समय के लिए समाधी से बाहर आते हैं दिव्य प्रयोजन मात्र के लिए , ए एक अवतार होतें हैं ।
ए भगवान के स्वरूपशक्ति के अंश होते हैं ।
पृथ्वी पर कुछ जीवों के उद्धार के लिए आतें हैं । एक विशेष दैविक प्रयोजन के लिए भगवान के आदेश से पृथ्वी पर अवतार ले कर आते हैं , अपना भगवद् कार्य करतें हैं और फिर अपने दिव्य लोक चले जाते है ऐसे महापुरूषों को परमहंस कहते हैं । जैसे रामकृष्ण परमहंस , शुकदेव परमहंस , बुद्ध , महावीर आदि परमहंस धरा धाम पर आएं हैं ।
श्री राधे ।:- गुरूदेव के द्वारा दिया ज्ञान से । :- संजीव
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