उत्तर :- मन माया का बना है । मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार चार चिज मिलकर अंत:करण कहलाता हैं ।
यह सूक्ष्म शरीर का भाग है । सूक्ष्म शरीर भी माया का बना है , और नश्वर है ।
जबकि आत्मा नित्य है , चेतन है और दिव्य है ।
मरने के बाद पंच महाभुत का यह स्थूल शरीर अपने पंचतन्मात्रा में मिल जाता हैं । लेकिन सुक्ष्म शरीर पंचभुत शरीर से निकल कर दूसरी यात्रा पर चली जाती हैं ।
सूक्ष्म शरीर में कारण शरीर व आत्मा रहती हैं ।
मनुष्य जब भगवान को प्राप्त कर लेता है तब सूक्ष्म शरीर से आत्मा निकल कर दिव्य लोक में चली जाती है ।
या मौक्ष प्राप्त करने वाले की आत्मा ब्रह्म में लीन हो जाती है ।
इसी को मौक्ष कहते हैं ।
जब तक मौक्ष नहीं मिलती या भगवान की प्राप्ती नहीं होती तब तक आत्मा सूक्ष्म शरीर के साथ एक शरीर से दुसरे शरीर की यात्रा करता रहता है ।
इसी को कहतें हैं पुनर्पि जननम , पुनर्पि मरनम । इसी को कहतें हैं आवागमन ।
इसलिए मरने के बाद सूक्षम शरीर मन , बुद्धि , चित् , अहंकार , और पांच कर्म इंद्रियां , पांच ज्ञान इंद्रियां और पंच प्राण के साथ दुसरा शरीर धारण करता है । यह शरीर अपने कर्म के अनुसार चौरासीलाख योनि में कोई भी शरीर प्राप्त करता है और उसी शरीर के अनुसार वृति बदल जाती है , पीछले सारी बातों को भूल जाता हैं ।
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