Tuesday, 13 April 2021

मेरा निज अनुभव साक्षी मंदिर उड़िसा और बरसाना धाम ।

मैं इसी साक्षी गोपाल मंदिर उड़िसा में, भगवान श्रीकृष्ण के बगल में खड़ी राधा रानी जी का पैर साक्षी गोपाल मंदीर में पीछले साल अचानक छु लिया था । पंडित जी गुस्सा गए थे । मेरे मुख से विनम्रता के साथ , दीनता से अपने आप निकल गया था उनके सामने " मैं तो अपनी मां का पैर छुआ है , आपके लिए ए भगवान् हैं, लेकिन ए तो मेरी मां है मां सिर्फ मां ,और बच्चे को मां के पास जाने से कौई रोक सकता है भला ! चाहे बच्चा गन्दा में हीं लिपटा क्युं ना हो ! 
तब पंडित जी हंसने लगे , क्रोध शांत हो गया उनका । श्री राधे । वो वोले राधा रानी का चरण दर्शन साल में एक बार हीं दर्शकों को होता है , इसलिए वोला था ,‌अब उनकी जैसी इच्छा । 

एक बार बरसाना‌ धाम में राधा रानी के दरवार में 2017 में दर्शन के लिए गए । प्रसाद पाने के लिए बहुत भीड़ देखकर थक कर उनके महल में बैठ गया , उस दिन बहुत पैदल चलना पड़ा था मुझे धाम में। और आंखों में अपने आप हीं आंसु बहने लगे , मुझे बहुत भीड़ अच्छा नहीं लगता है , मन हीं मन सोच रहा था कि राधा रानी तो मेरी भी मां हैं । अगर वो प्रसाद देना हीं चाहेंगी तो मुझे प्रसाद जरूर मिल जाएगा । 
कुछ समय में देखता हुं भीड़ कम हो गई और मां के बगल में खड़े एक पंडित मुझे बुला रहे हैं । पहले तो नहीं समझा मैं , पर वो आवाज़ देकर हाथ के इशारे से वोले की तुमको हीं बुला रहा हुं । मैं गया उनके पास , वो मेरे सिर को हाथ से दवा कर राधारानी के चरण में झुका दिए और उनका एक माला मेरे सिर में डाल दिय और हाथों में ढ़ेर सारा प्रसाद डाल दिए । श्री राधे ।- आपका संजीव

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