मेरे एक मित्र ने आज कहा मुझसे की देश हीं नहीं पुरे विश्व में और प्रायः सभी राज्यों में आज शूद्र का शासन है इसलिए अव्यवस्था फैली है बहुत से उन राज्यों में जहां शूद्र का शासन है , अस्तु !
मेरा उत्तर :- आपका कहना सही है कि आज पुरे विश्व के बहुत तेरे देशों में , भारत में और अनेक राज्यों में शूद्रों का शासन है । पर सभी शूद्र शासकों का आचरण खराब है आज ऐसा मैं नहीं मानता । पहले भी चंद्रगुप्त मौर्य शूद्र शासक हुआ जो चाणक्य जैसे उच्च कोटी के ब्राह्मण गुरू के कृपा प्रभाव के कारण उत्तम शासक हुआ है हमारे देश में हीं । एक उच्च आदर्श आचारवान पुरूष किसी को भी उत्तम बना सकता है।
हमारे देश में डाकु रत्नाकर भी नारद जी जैसे गुरू को पाकर महर्षि हो गय , महर्षि वाल्मिकी हो गए जिन्होंने रामायण जैसा सर्वोत्तम काव्य लिख दिया , कालीदास कबीर दास , रै दास , सूरदास, रविदास, रसखान भगवद् प्राप्त कर कर्म से उसी जन्म में उच्च कोटी के ब्राह्मण बन कर भगवद् प्राप्त संत व ब्राह्मण तुल्य कार्य किए हैं । विस्वामित्र क्षत्रिए से ब्राह्मण बन गए भगवद् प्राप्ति के बाद् आदि तमाम उदाहरण भरा परा है इतिहास में ।
और अगर ऐसा है भी आपके अनुसार कहीं तो जरा खोजिए , चिंतन करिए की आज इसका जिम्मेदार कौन है पहले ?
जरा ध्यान मुद्रा ( Meditation ) में जाकर इसका कारण ढुंढेंगे तो उत्तर मिल जाएगा ।
मुझे जो उत्तर मिला है वो निम्नलिखित हैं :-
हिंदु संस्कृति में मानव जाती को चार वर्णों में बांटा गया है सदियों पहले । यह जन्म के साथ मुख्यतया कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था था समाज और देश के व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए । चारों वर्णों का बराबर महत्व था समाज और देश रूपी गाड़ी के चार पहिए की तरह । गाड़ी का चार पहिए में से एक की भी हवा निकल जाए तो जिस प्रकार गाड़ी नहीं चल सकती , ठीक उसी प्रकार चारों वर्णों में से कोई एक भी अकर्मण्य हो जाए तो समाज बिखड़ जाता है ।
और जब तक चारों वर्ण बिना भेद भाव के मिलजुल कर अपना फर्ज पुरा करते रहे तब तक हमारे भारत में बहुत सुंदर रूप, सुचारू रूप से सभी कार्य होते थे , समय बदला , यवनों व मुगलों का आक्रमण शुरू हुआ , उसके बाद अंग्रेजों का और भारत की मूलभूत शिक्षा निति ( नालंदा , विक्रमशिला और तक्षशिला ) को बर्बाद कर दिया गया , हमारा भारत अपने उत्तम शिक्षा व्यवस्था के लिए पुरे विश्व में जाना जाता था , बाहर के देशों से लोग यहां पढ़ने आते थे , फाहयाण ह्वेनसांग आदि अनेकों उदाहरण हैं इसका ।
पर आताताइयों का आक्रमण के फलस्वरूप हमारी शिक्षा व्यवस्था तहस नहस होने के बाद एक अराजकता फैला । डिभाईड एंड रूल जैसी मानसिकता के लोग समाज के चारो वर्णों में फुट डालने में कामयाब हुए जो आजतक कायम है ।
ध्यान रखिए एक उत्तम शिक्षा हीं लोगों को चरित्रवान बनाता है । पर बुरी व्यवस्था के फलस्वरूप
ब्राह्मण वर्ण के लोग योगी की जगह भोगी होने लगे , धर्मी के जगह कुधर्मी होने लगे , त्यागी के जगह लोभी हो गए । और आज तक यह शिलशिला जारी है । बात करवी है पर सत्य है ।
क्षत्रिय वर्ण के लोग देश का रक्षक ना होकर भक्षक होने लगे , मानसिंग और जयचंद जैसा क्षत्रिए पैदा होने लगे ।
चाणक्य जैसा आचारवाण , बिचारबाण और नीतिवाण ब्राह्मण इतिहास के पन्नों में खो गए ।
वैश्य वर्ण के लोग व्यापारी ना होकर मुनाफाखोर हो गए ,
आज हमारे देश में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसा सेवा क्षेत्र भी व्यापार का माध्यम बन गया , ताकतवर और रसूख वाले माफिया शिक्षा और मेडिकल व्यवस्था के ऊपर कब्जा करके अनैतिक तरिके से धन कमाने लगे ।
इनमें से ज्यादा लोग यही तीन वर्ण वाले हैं ।
उपर्युक्त तीनों वर्ण के लोग भोगी , कामी और भक्षक बन गए । तो चौथा वर्ण भी वैसा ही कर रहा है अब ! सिखाए तो हम हीं ।
तो जाहिर है की उपर्युक्त तीनों वर्णो के लोग में से 90% लोग जब भ्रष्ट हो गए तो भगवान ने शूद्र को मौका दिया शासन करने के लिए ।
तो अब तकलिफ क्यों हो रहा है हमें ?
जब जब हम धर्म से विमुख होकर अधर्म के मार्ग पर आगे बढेगें तो जाहिर है कि दुसरा यह काम अपने हाथ में लेगा ही ।
अतः हमें दुसरे में दोष देखने से पहले खुद अपने में झांकना होगा की हम ऐसा क्यों हो गए ?
हम अपने पतन के लिए खुद दोषी हैं । और जब स्पेश दिया तो आरक्षण से तो कोई आएगा हीं और हम पर शासन करेगा ही करेगा । और कर रहा है तो अब बुरा क्यों लग रहा है हमें ?
जब हम अपना चरित्र , नैतिकता , ईमान और धर्म को बेचना शुरू कर देतें है तो हमारा पतन तो निश्चित है और उसके लिए हम खुद दोषी हैं :- संजीव कुमार ।
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