हमारे प्राण प्रिय गुरूदेव श्री कृपालु महाप्रभु जी ने वेदों शास्त्रों का प्रमाण देकर , जीवन पर्यंत अथक परिश्रम करके शास्त्रों के क्लिष्ट श्लोकों के वास्तविक अर्थ को सरल और शुद्ध भाषा में हमें समझाकर भगवान की भक्ति,प्रेम के मार्ग में फैले अंधविश्वासों का खंडन करके भक्ति के वास्तविक सिद्धांतों को इस कलिकाल में पुनर्स्थापित किया हैं, उन्होंने पोंगा पंडितों, अयोग्य ज्योतिषों, स्वघोषित तथाकथित विद्वानों के फैलाए पाखंड, ढोंग, गलत फहमी पर से पर्दा ऊठाकर भक्ति को सीधा सरल बना कर हमें भगवान के विशुद्ध भक्ति के तरफ प्रेरित किए है , ।
उन्होंने सनातन धर्म के तमाम शास्त्रों में छुपे तमाम श्लोकों के वास्तविक अर्थ का सरल भाषा में प्रचार प्रसार करके हमें उन शास्त्रों के श्लोकों का मूल रस को पिलाया है । उन्होंने आध्यात्म और भौतिक दोनों को भगवान की भक्ति की और शरीर के आवश्यकता के सार्थकता को सिद्ध किया है ।
उन्होंने मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य से हमें परिचित कराया हैं । उन्होने अति उत्कृष्टता से वैज्ञानिक पहलुओं और आध्यात्मिक पहलुओं व शास्त्रों में छुपे गुढ़ व दिव्य तत्त्वज्ञान द्वारा उदाहरण देकर सनातन धर्म में विधर्मियों द्वारा फैलाए गए अंध विश्वास , कुरितियां , बुराईयों को दुर करने का अथक प्रयास किए हैं ।
उन्होंने आजकल कलयुग में किए जा रहे भक्ति के तरिके हीं नहीं वल्कि कलयुग में ज्ञान मार्ग , कर्मकांड , तीर्थ , आदि की कलिकाल में निष्फलता के मूल स्वरूप को समझाते हुए यह सिद्ध किए हैं कि जब तक मन का अटैचमेंट भगवान में ना हो तबतक ना तो ज्ञान मार्ग , ना कर्मकांड और ना हीं जप तप , योग और तपस्यचर्या , गंगा स्नान का कोई फल है ।
उन्होंने अनेकों शास्त्रों का प्रमाण देकर यह साबित किए की बिना मन के अटैचमेंट का सारा कर्म एक शारीरिक वहीरंगा उछल कुद ( फिजिकल ड्रील) मात्र है जिसका कोई लाभ नहीं वल्कि नुकसान है , भ्रम है , विप्रलिप्सा , कर्णपाटव और प्रमाद रूपी भ्रांत ज्ञान फैला है ।
श्री महाराज जी ने सनातन धर्म में फैले तमाम अंधविश्वासों , कुरितियो , बुराईयो पर से पर्दा हटा कर हम मानव जाति का कल्याण हीं नही बल्कि सनातन धर्म को भी उनके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया है ।
आज जो भी भाग्यशाली लोग श्री महाराज जी के शरण में है , उनको अपना प्राणाधार मानते हैं , उनपर अटुट श्रद्धा और दृढ़ विस्वास करतें हैं उनके इसी जीवन में उनके कल्याण से दुनिया की कोई शक्ति (स्वयं भगवान की माया शक्ति भी ) नहीं रोक शक्ति है यह उनके द्वारा घोषित चैलेंज है ।
जो लोग अभी भी संशय और भ्रम में हैं उनसे एक बार पुनर्आग्रह है कि वो उनको अपना मान लें और उनके निर्देशित साधना और दिव्य बातों को तहे दिल यानि मन के गहराइयों से मान कर अपने जीवन के मूल उद्देश्य के प्राप्ति के राह में अग्रसर हो ।
अन्यथा आने बाले अनेक युगों तक भी जब लोग विकृत ज्ञान कुविज्ञान , विधर्मियों द्वारा फैलाए गए भ्रांत ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी ले जा कर अंतत्वोगत्वा थक जाएगें तो अंत में केवल श्री महाराज जी का आज के बतलाए एक मात्र मार्ग ही सहारा बनेगा उनका ।
अतः भटकना क्यूं ? आज ही , अभी ही क्यूं न उनको अपना मान कर उनके बतलाए मार्ग का अनुसरण करें और अपने भावी पीढ़ी से भी अनुसरण करवाएं । क्यों हम खुद और हमारे भावी पीढी को अन्यत्र भटकने के लिए छोड़े ।
क्योंकि भटकने के बाद तमाम दुसरे की मनगढ़ंत फिलौसफी को अपनाने और उस पर चलने के बाद आना तो उनके शरण में ही पड़ेगा , क्योंकि विशुद्ध भक्ति का कोई दुसरा मार्ग है हीं नहीं जगत में ।
जब विश्व का सर्वोत्तम बैद् , हकीम, डौक्टर श्री कृपालु महाराज जी के रूप में स्वयं यूगलसरकार हमारे लिए इस कलिकाल में शूलभ हुए , खुद के परम कल्याण के लिए उनके बतलाए औषधि हमारे लिए उपलब्ध है तो अनेक डौक्टरों के यहां भटकना क्यूं ?
सोचना चाहिए हमसबको ।
मैंने श्री कृपालु महाप्रभु उर्फ यूगलसरकार के द्वारा मेरे अंत:करण में डालें गए प्रेरणा के परिणामस्वरूप सबके कल्याण के लिय उपर्युक्त बातें लिखी हैं । श्री राधे । :-
आपका संजीव कुमार , 23 अप्रैल 2021.
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