एक व्यक्ति भगवान को हमेशा गाली देता रहता था अकेले में या सबके सामने । वो भगवान को बहुत से गाली देता रहता था । वो किसी की बातों पर ध्यान नहीं देता था , अपनी मस्ती में रहता था , और भगवान को गाली देता था ।
गांव के लोग जब उसके झोंपड़ी के पास से होकर गुजरते थे भगवान की पुजा अर्चना के लिए मंदिर में सुबह और किर्तन करने जाते थे शाम में तो उसको गाली देता सुनते थे । और फिर सब मिल कर उस बेचारे को भला बुरा कहता था , कोई कोई तो ढेला भी फेंक कर उसको मारता था , पर वो सब हंसी के साथ खुशी खुशी सह लेता और किसी के उपर कोई गुस्सा नहीं करता था ।
उल्टे किसी के कांधे से गिरा गमक्षा संभाल कर रख देता और उसके लौटते समय उसको वापस दे देता था मूस्कुराते हुए ।
कई दिन बीत गया , एक दिन वो व्यक्ति अपने झोपड़ी से गायब हो गया ।
लोगों ने सोचा चलो अच्छा हुआ । वला ठली , एक पापी जो भगवान को चौबिसो घंटे गाली देता रहता था और हम सबके कान में परता था तो हमको भी सुनकर पाप होता था , इससे निजात मिला । वो कहीं जाकर मर गया होगा , अच्छा हुआ , दफा हो गया , अच्छा हुआ ।
अब जिस दिन से वो गायब हुआ उस दिन से वर्षा बंद हो गया गांव में और जिला में । पेड़ पौधा जलने लगा । पक्षी चहकना बंद कर दिया । गाय दुध देना बंद कर दिया ।
गांव के गाय का सभी बच्चे , कुत्ता , बंदर आदि रोने लगता था सुबह शाम ।
चारों तरफ रोग , शोक आ गया । त्राहि-त्राहि मचने लगा ।
गांव वाले एक पहुंचे हुए संत के पास गय और पुछे क्या करूं रात दिन कुत्ता रोता है , गाय दुध नहीं देती है । फुल नहीं खिलते डाली पर , रात को शियार और कुत्ते रोतें हैं सब विमार हो रहे हैं । बहुत उपाय किया कुछ समझ नहीं आता है । अब आपके शरण में हुं । बताईए कौन सा अपराध हो गया हम सबसे । हम सब सुबह शाम भक्ति करतें हैं भगवान का ।
एक हीं गाली देने बाला पापी था , वो चला गया , अब तो कोई गांव में ऐसा नहीं जो उसके जैसा पापी हो ।
फिर भी हम सब पर विपत्ति आ गई है । ऐसा क्यों ।
तो वो भगवद् प्राप्त संत ने ध्यान किया । फिर कुछ देर वाद वोले ।
तुम्हारे गांव में एक मात्र वही तो धरमात्मा था , वांकी तुम सब लोग पापी हो । भक्ति का दिखावा करते हो नाटक करते हो ।
वो चला गया जो एक हीं पुण्यात्मा था तुम्हारे गांव में। जिसके बल पर तुम सब खुशहाली से थे । पेड़ पौधा , गाय , बछड़ा कुत्ता आदि सब यह जानते हैं । उसके जाने से भगवान श्री कृष्ण उसके पीछे पीछे चले गए । उनके पीछे लक्ष्मीं भी चली गई । अब भोगों ।
सब लोग रोने लगे । पांव पकड़ लिया संत का । आप कुछ करिय ।
संत बोले जिसके प्रति तुम दुर्भावना किया है माफी तो वही देगा । भगवान और मैं भी नहीं माफ कर सकता हुं ।
अब गांव बाले सब मिलकर दर दर का खाक छानने लगा उसको ढुढने के लिए ।
तीन महीने बाद वो मिला । सब उसके पैड़ों में गिर कर माफी मांगा । उन्होंने माफ भी कर दिया ।
सब लोग बहुत धन चढ़ाया उनके पैर में, वो किसी चीज को हाथ भी नहीं लगाया और अपना झोली उठाया फिर भगवान को गाली देता हुआ , मुस्कुराता हुआ चल दिया किसी अनजान रास्ते की तरफ ।
तो इससे आपको क्या शिक्षा मिली । अपना काम करिए किसी पर अंगुली मत उठाईए । अपनी दो अंगुली की खोपड़ी से । आप सर्वांतर्यामी नहीं जो कौन क्या है जान लेंगें , किसी के बाहरी चाल चलन से आप नहीं जान सकते । नहीं तो आपको हीं बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा । आपका दोस्त आपको छोड़ कर चल देगा । जिसको आप अपना दुश्मन मानने की भूल कर रहें हैं ।
श्री राधे ।
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