मेरा उन सबसे बहुत प्रार्थना है जो हर दिन , दिन के हिसाब से अलग भगवान के मंदिर में मत्था टेकते हैं और अलग अलग दिन अलग अलग भगवान का फोटो मुझे भेजते हैं ,वे सभी कृप्या मुझे प्रमाण दे उन मुल विनिर्गत ग्रथों या स्मृत ग्रंथों शास्त्रों का केवल जिसमें लिखा हो कहीं पर भी कि सोमवार भगवान शंकर का है , मंगलवार भगवान बजरंगबली का है , बुधवार गणेश जी का है आदि आदि मुर्खतापूर्ण बातें ।
पर ध्यान रहे मुझे यह प्रमाण केवल भागवद् गीता , वेद ,रामायण से ही चाहिए या पांचों मूल जगद्गुरू के लिखे किसी भी ग्रंथों से , या भगवद् प्राप्त प्रैक्टिकल दिव्य महापुरुष जिन्होंने भगवान को देखा है साक्षात , सुना है गले लगाया है , (सपने में या आभासिय नहीं , साक्षात सामने से देखा है ) जैसे तुलसीदास सुरदास , रै दास ,रविदास , मीरा , बिद्यापति , तुकाराम , नरहरि , गुरू नानक देव आदी वास्तविक भगवद् प्राप्त संतों के कथन और पुस्तकों को छोड़ मैं किसी का नहीं मानूंगा ।
पोंगा पंडित , गद्दी धारी शंकराचार्य , या स्वघोषित जगद्गुरूओं और वाकी किसी भी शास्त्रों को मैं प्रमाण नहीं मानुंगा ।
मुझे हर रोज काफी पढ़ें लिखे लोग हर रोज के अलग अलग भगवान का फोटो भेजते हैं । इतना पढ़ें लिखे होकर भी नहीं समझते की प्रत्येक दिन प्रत्येक क्षण ,प्रत्येक बस्तु में एक हीं भगवान श्री कृष्ण है और सभी भगवान उनका हीं स्वांस है ।
हम आदमी को प्रायः संप्रदाय , जाति समुदाय में बांट दिए नादान क्षुद्र लोगों के बहकावे में आकर ।
और कहते हैं अंग्रेज डिभाइड रूल सिखाया ।
नहीं जी आपलोगों ने जो अंग्रेजों को सिखाया वहीं हमारे देश पर लागु किया हमसे हीं सिख के वो ।
हमारे देश में सनातन धर्म में वर्ण व्यवस्था और जाति कर्म पर आधारित था पर पोंगा पंडितों ने अपने स्वार्थ के हित के लिए यह सब किया ।
दिन भी वांट दिया , भगवान में भी भेद सिखा दिया ।
वो सोमवार को शंकर जी को जल , रविवार को सूर्य भगवान को जल , शनिवार को शनिदेव को तेल , वो बुधवार को किसी अन्य भगवान को देखना भी नहीं गणेश जी को छोड़ कर , बृहस्पतिवार बार को केवल विष्णु की आराधना करना , और शुक्रवार को कोई भगवान नहीं मिला तो नया भगवान गढ़ लिए संतोषी माता । छी , छी, छी , ।
भाई साहब घर में भी क्यों नहीं बांट लेते हैं आप लोग ,
सोमवार को अपने पिता को पुजेगे़ , मंगलवार को अपने छोटे ब्रह्मचारी भाई को , बुधवार को अपने बड़े भाई को बृहस्पतिवार को अपने चाचा को , शुक्रवार को अपने चाची को , रविवार को अपने नाना को । यह भी कर लिजिए ।
हमलोग पढ़ें लिखे हैं । हमलोग वांकी बातों में तो बड़ा वैज्ञानिक बनते हैं और कहते हैं विज्ञान से साबित करो । प्रमाण मांगते हैं यहां कहां चला जाता है यह बात , अंधविश्वास को मानते हैं यहां और अपने अगले पिढी को भी यही सौपतें है , इसलिए तो पुजा पाठ का फल तो दुर उल्टा नुकासान होता है सबको ।
तो इसमे हम कैसे मान लेतें है विना असली शस्त्रों के प्रमाण को देखें समझे और जाने ???
प्रमाण देखना चाहिए हमको वो भी पोंगा पंडितों या थ्योरिटिकल मैंन व स्वघोषित तथा कथित विद्वानों का कहा और उसके लिखे शास्त्रों का नहीं ।
हमें मांगना चाहिए प्रमाण केवल वेद , भागवद् , गीता , रामायण आदि विनिर्गात शास्त्र और श्रौत्रिए ब्रह्मनिष्ट महापुरूषों का कहा और उनका लिखा पुस्तकों का केवल । दिखा दिजिए प्रमाण तो हम मानेंगे ,नही तो हम पाप नहीं करेंगें ।
वो छुटभैय्ए ज्योतिषि और उनके मिलावटी शास्त्रों को प्रमाण मैं नहीं मानुगां ।
काल कर्म में पुराणों , उपनिषदों और अन्य शास्त्रों में खुब मीलावट हुआ है तथाकथित क्षुद्र स्वघोषित विद्वानों द्वारा । इसलिए इनको प्रमाण कभी नहीं मानूंगा ।
पर वेद , श्रीमदभगावद् , रामायण एवं गीता अभी भी पु्र्णत: निष्कलंक है और पुनदोष पंक रहित है इसलिए इन्हीं शास्त्रों और पांचो मूल जगद्गुरूओं के लिखे शास्त्रों और उनके कथन और भगवान के निज जन यानि हरि का जन , यानि हरिजन जैसे तुलसी सुर मीरा , कबीर , रै दास ,रविदास, विद्यापति रसखान , तुकाराम , नरहरी , हरिदास , हित हरिवंश , चैतन्य महाप्रभु रामानंदाचार्य , अष्ट गोस्वामी आदि जैसे जीव गोस्वामी सनातन गोस्वामी का प्रमाण दिजिए ।
मुझे अन्य मिलावटी ग्रंथों और किसी के भी तर्क कुतर्क का प्रमाण नहीं चाहिए ।
अंत में यही कहुंगा सनातन का मूल कोई भी शास्त्र इन सब अंधविश्वासों का कभी समर्थन और सिद्ध नहीं करता , सनातन कि बदनामी पढ़ें लिखे मुर्ख करवाते हैं और खुद तो पाप करते हैं और अंधविश्वासों को भी बढ़ावा देकर पुरे विश्व में सनातन को बदनाम करवाते हैं , पाखंड और पाखंडियों से बचें ।
जिस भगवान में श्रद्धा हो , आपने उनको अपना एक मात्र इष्ट माना है जिन भगवान को उनको हीं प्रत्येक दिन , हर क्षण , हरेक समय तीन सौ पैंसठो दिन भक्ति करिए । नहीं तो लाभ के बदला हानी सुनिश्चित होगा । सम्मान सभी भगवान का करना चाहिए पर प्रेम एक से हीं ।
"एक हीं साधे सब सधै , सब साधे सब जाए "
आपका भाई संजीव । श्री राधे ।
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