Wednesday, 19 May 2021

मेरी कविता :- " रोता हूँ जब तेरी यादो में तुम ही आंसु बन जाते हो |

मेरी कविता :- 
" रोता हूँ जब     तेरी यादो में 
   तुम ही आंसु   बन जाते हो |

  लिखता हुँ जब कोई गीत तुझे 
  तुम छन्द बन      छा जाते हो |

  बन कर  बसंत तुम पतझर  में 
  हर गुलशन को   महकाते   हो |
 
  बन कर कभी राधा की करुणा 
  भक्तो  पर      प्रेम  लुटाते   हो ||

  घनघोर   निशा   की बेला   में 
  तुम ही   चन्द्रमा बन जाते  हो |
 
 बन कर  गोपी का   गीत   प्रभु 
 कृष्ण को  तुम ही रीझाते    हो |

बन धुन वंशी कभी  कान्हा   की
भक्ति का     गीत    सुनाते   हो |

  बन कर कभी राधा की करुणा 
  भक्तो  पर      प्रेम  लुटाते   हो ||

   मेरे   इस     निरस   जीवन  में
  तुम   बहार     बन  जाते    हो |

  बन कर   घटा घन   घोर  प्रभु 
  बन मोर  नाचते     मधुवन में   |
  
  छा जाते बन हरियाली ब्रज में
  तब तुम ही कृष्ण  बन जाते हो |

  बन कर कभी राधा की करुणा 
  भक्तो  पर      प्रेम  लुटाते   हो ||

  कभी घनन घनन कभी छनन छनन 
  तुम वंशी मधुर बजाते हो 
  तुम वंशी मधुर बजाते हो ||"
  
  ( मैं ए गीत गुरुदेव  आपके  प्रेरणा ही से लिखा है और आपको समर्पित-संजीव आपका चरणानुरागी )

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