Saturday, 8 May 2021

हमारे वेद् शास्त्र , वास्तविक संत , महापुरूषों ने केवल उन्हीं मां बाप की पुजा करने के लिए कहते है, जो भगवान श्री कृष्ण का भक्त हैं ।

हमारे वेद् शास्त्र , वास्तविक संत , महापुरूषों ने केवल उन्हीं मां बाप की पुजा करने के लिए कहते है, जो भगवान श्री कृष्ण या कोई भी भगवान या उनके नीज जन  यानि परम भक्त यानि वास्तविक संतो को गुरू मान कर  ( सभी भगवान श्री कृष्ण की हीं स्वगत् भेद शुन्य शक्ति है जैसे दुर्गा जी , बजरंग बली , शंकर पार्वती जी , गणेश जी , विष्णु लक्ष्मी जी या उनके संत ) उनका भक्ति करतें हैं । 
वैसे को नहीं जो खुद शराब व मांस भक्षण करतें हैं और अपने बच्चे को भी करने के लिए प्रेरित करतें हैं, घर परिवार और समाज में ही दुसरो से दुर्भावना रखते हैं और बच्चों में कुसंस्कार भरते हैं, वो खुद अपने सास ससुर और बड़ों  का कभी ख्याल नहीं रखते  और भगवान में उन्हे जरा भी श्रद्धा और रूची नहीं, ऐसे मां बाप हिरण्यकशिपु की तरह त्याज्य हैं । 
भगवान से विमुख करने वाले कैकई को भरत त्याग दिए और हमें सिखाया  । भगवान से बैर करने बाले बड़े भाई रावण को विभिषण त्याग दिया, अतः ऐसे दुष्ट माता पिता जो अपने बच्चे को भगवान की तरफ प्रेरित ना करें , और ना खुद भगवद् प्रेमी हो उनसे भीतर से  सदा उदासीन रहकर उनके जरूरत को यथा शक्ति पुरा करने के अलावा कुछ नहीं करना चाहिए । 
माता पिता श्रवण के माता पिता जैसा भगवान् का भक्त होना चाहिए फिर श्रवण कुमार ने अपने माता पिता की भक्ति की । 
कहने का मतलब जो भगवान का बैरी हो उनसे दुर रहना श्रेयकर है । चाहे वो अपना मां बाप , भाई बहन , पत्नी पुत्र या पति ही क्यूं ना हो । यह शास्त्र का उद्घोष है । श्री राधे ।

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