Sunday, 23 May 2021

आज के परिदृष्य में , दुष्ट व्यक्ति ( जिसके अंत:करण में विष हीं विष भरा है ) , दुष्ट समाज , दुष्ट राष्ट्राध्यक्ष को उत्तम ज्ञान देकर समझाना बहुत बहुत मुश्किल हैं ।

आज के परिदृष्य में , दुष्ट व्यक्ति ( जिसके अंत:करण में विष हीं विष भरा है ) , दुष्ट समाज , दुष्ट राष्ट्राध्यक्ष को उत्तम ज्ञान देकर समझाना बहुत बहुत मुश्किल हैं । कारण है मोराल क्राइसिस , नैतिक पतन । आज के प्रदुषित परिवेश में अपने बुद्धि पर बल देने वाले बहुत कम लोग हैं । अतिशय स्वार्थ सिद्धि के लिय छल प्रपंच का सहारा लोग लेतें है। कुछ शैतान मौलवी , मुल्ला, साधु और पादरी के भेष में घुमतें हैं । अयोग्य व्यक्ति महत्त्वपूर्ण पदों पर कई जगह बैठे हैं । देश, कलुषित मानसिकता वादी स्वार्थी तत्वों से परेशान है। कुछ लोग अपने ही परिवार का घातक है( दारू पीकर दंगा करते हैं घर में) , कुछ लोग अपने हीं जाति ( मानव जाति) , धर्म , समाज और देश का दुश्मन हैं वो भला निरीह बेजूवान और निर्बल को कैसे जीने देगा ? सत्ता कैसे भी किसी तरह भी हांथ में आ जाए इस उद्देश्य की राजनीति होती है । 

आज का हालात त्रेता युग के उस काल से जिसमें भगवान को रावण बद्ध करना पड़ा और द्वापर के अंतिम काल से भी काफी नीचे गिर गया है , दूषित हो गया है जिसमें रावन जैसा पंडित , ज्ञानी भी भगवान राम के उपदेशों को नहीं समझ सका , और दुर्योधन और उनके पिता धृतराष्ट्र को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं समझाया ,‌शांति प्रस्ताव लेकर गए स्वयं भगवान । 
जरा सोचिए की स्वयं भगवान शांती संदेश लेकर गए , और दुर्योधन के धृष्टता पर अपना चक्र दिखा कर , तमाम सभा में अपने मुल स्वरूप का एक झलक भी दिखाया , ताकी शांती संदेश का प्रस्ताव स्वीकार हो डर के मारे भी और युद्ध टल जाए पर कोई प्रभाव नहीं हुआ । और अंत में एक युद्ध का विकल्प हीं बचा दोनों काल में । 
आज उससे भी बदतर स्थिति है । 
सनातन धर्म में वेद में इसलिए साम , दाम , दंड, भेद का भी विधान है । 
सनातन पहले तो शांति पसंद करता है । नहीं मानने पर दाम से शांती कायम करना चाहता है । फिर भी नहीं तो भेद , विभेद द्वारा विरोधी को खंडित करके शांती स्थापित करता है और फिर भी नहीं समझा तो फिर धर्मयुद्ध द्वारा दुष्टों को दंड देने का विधान है । 
अतः अब आजकल जो दुष्ट लोग , देश , समाज शांती का पाठ नहीं समझता और उस पर साम ,दाम एवं भेद का भी कोई असर नहीं होता है , उसको धर्मयुद्ध द्वारा दंड देने का अंतिम विकल्प हीं शेष बचता है । 
 :- जय जय जय श्री राम ।

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