Saturday, 15 May 2021

हमें अगर अपने भगवान श्री कृष्ण पर भरोसा है तो फिर हम सनातनी इतना बैचैन क्यूं हैं कि कोई सनातन धर्म को समाप्त कर देगा ? ऐसा सोचने बाला अगर कोई सनातनी भी है तो गलत है। फुल मैड है ।

हमें अगर अपने भगवान श्री कृष्ण पर भरोसा है तो फिर हम सनातनी इतना बैचैन क्यूं हैं कि कोई सनातन धर्म  को समाप्त कर देगा ? ऐसा सोचने बाला अगर कोई सनातनी भी है तो गलत है। फुल मैड है ।

सनातन धर्म का उद्भव और अंत ।। ( एक सत्य चिंतन )

जीस प्रकार भगवान अनादि है उसी प्रकार हमारी आत्मा अनादि है और ठीक उसी प्रकार सनातन धर्म ( हिन्दु संस्कृति ) आनादि है । 
हम कब से ? जब से भगवान , भगवान कब से ? जब से हम । भगवान और हम कब से जब से सनातन धर्म । 
तो हम तीनो का तीनों सनातन है । सनातन मतलब सदा से है ‌। तीनों की उत्पत्ति नहीं होती । न जन्म होता है । 
सिर्फ प्रकटी करण होता है । यानि भगवान श्री कृष्ण के संकल्प मात्र से सृष्टि होती है और उसी के साथ साथ सनातन धर्म ब्रह्मा जी के साथ साथ प्रकट हो जाते हैं ।
और इन तीनों को अंत भी नहीं है । यानि भगवान , हमारी आत्मा और सनातन तीनों अजन्मा हैं ।
और इन तीनों को कोई भी समाप्त भी नहीं कर सकता । स्वयं भगवान भी नहीं । 

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
 न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।।२३।। गीता ।

तो इसका भावार्थ तो सब लोग  जानते हैं कि आत्मा हो या परमात्मा इसको किसी भी बिधि कोई समाप्त नहीं कर सकता है स्वयं भगवान भी नहीं  । 

तो यह स्वत: सिद्ध है कि तीनों का जन्म नहीं होता , तीनों का अंत किसी भी विधि नहीं हो सकता । 
तो तीनों को समाप्त करने का कोई सोचें अगर तो वो फुल मैड है । थोड़ा या हाफ नहीं फुल मैड । 

तो फिर हम सनातनी इतना बैचैन क्यूं हैं कि कोई सनातन धर्म  को समाप्त कर देगा ? ऐसा सोचने बाला अगर कोई सनातनी भी है तो गलत है , जो आजकल कहते रहते हैं कि फलां फलां धर्म बाले , अपना जनसख्यां विस्फोट करके पुरे धरती पर फ़ैल जाएंगे और सनातन एक दिन खत्म हो जाएगा , मैं कहता हुं वो भोले हिन्दु है जो ऐसा सोचता है  । उनको खुद पे अपने सनातन धर्म पे और अपने ईष्ट पर भरोसा विल्कूल नहीं है । यह उनके खुद की  बात और चिंता साबित करती है । 

सनातन धर्म अजन्मा है और अमर है । जैसा परमात्मा और हमारी आत्मा अमर है । 
हां हां आत्मा भी अजन्मा है और अमर है क्यों क्योंकि आत्मा का अंशी भगवान है । अतः यह भी अपने अंशी के जैसे अविनाशी है :-

"सुनहु तात यह अकथ कहानी। 
समुझत बनइ न जाइ बखानी॥ 
ईस्वर अंस जीव अबिनासी। 
चेतन अमल सहज सुख रासी॥1॥" - उत्तरकांड 7.117

और उसी प्रकार सनातन धर्म भी अजन्मा है और अविनाशी है । स्वयं भगवान भी स्वयं को , किसी  भी आत्मा को और ना सनातन धर्म का विनाश कर सकते हैं । तो फिर कुछ भोले सनातनी इतना हाय तोबा , चित्कार क्यूं कर रहें हैं मुझे समझ में नहीं आता ?

भगवान सर्व समर्थ  है । वो अपनी सत्ता की रक्षा स्वयं करते हैं । वो किसी भी  जीव और महापुरुष को भी यह अधिकार नहीं देते । 
वाकी सब शक्ति अपने संत अपने जन और महापुरूषों को दे देते हैं , पर दो कार्य सदा अपने पास रखते हैं ‌ ।
पहला -अपने सत्ता की रक्षा करना और दुसरा अनंत ब्रह्माण्ड के अनंत जीवों के मन में उठे संकल्पों को नोट करना । याद करिए श्री कृपालु महाप्रभु जी का दिया तत्वज्ञान ।
और अप्लाई किजिए मेरे इस चिंतन में ।
तो जब भगवान अपनी सत्ता , मतलब सनातन धर्म यानि नियम , यानि उनका संविधान यानि वेद् पुराण उपनिषद आदि सब की रक्षा वो स्वयं करते हैं । और अपने जन खुद पर भरोसा करने वाले , आस्था रखने वाले सज्जनों की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं । और जिस बसुंधरा पर अवतरित होते हैं उस भारत देश की रक्षा भी वही करते हैं तो चिंता कैसी ?
उन्होंने स्वयं कहें है :- 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ :- गीता ।

उनका उद्घोष है - वो सनातन धर्म , ( हिन्दु संस्कृति ) और इनमें और भगवान में दृढ़ आस्था रखने वाले साधु जन , सज्जन की रक्षा वो स्वयं करते हैं ।

 दुष्ट कुधर्मी , व्यभिचारी , राक्षसों , असुरों का उत्पात जब जब लिमिट से बढ़ जाता है तो वो खुद इन सबका एक साथ काम तमाम कर देतें हैं । 
और किए भी है । हम सभी जानते हैं । हिरण्यकशिपु का का और उसके साम्राज्य का , हिरण्याक्ष का और उसके साम्राज्य  से लेकर  त्रेता में रावण और उसके साम्राज्य लंका से लेकर द्वापर में कंश आदि सब का बजूद मिटा दिए ।
तो फिर हम सनातनी इतना भयभीत क्यों ?
भय का मतलब की हमें अपने भगवान पर , अपने इष्ट पर अपने सनातन हिन्दु धर्म पर भरोसा नहीं । 

सभी जानते हैं कि एक सनातन धर्म ही अजन्मा है और इसका अंत कभी नहीं हो सकता । 
और वांकी सभी बिचार धारा है जिसका जन्म हुआ है अलग अलग समय में  किसी के बिचार के कारण पीछले हजार दो हजार तो ढाई हजार साल में । और जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यू भी निश्चित है ।

और फिर सभी बिचार धारा उसी सनातन धर्म रूपी मूल( जड़ ) से जिसका मूल तना हिन्दु है और वांकी‌ सब  शाखा हीं तो  है ।
अब कोई बिचार धारा यह सोचे , कोई शाखा यह सोंचे की अपने हीं मूख्य तना और जड़ को समाप्त कर देंगे तो वो फुल मैड है । फुल मैड । वो खुद ही समाप्त हो जाएगा ।

और फिर भी नहीं माना तो भगवान तो कहें है की
 यदा यदा हीं धर्मस्य ..... 

तो होना ही है कल्कि अवतार और फिर एक बार असुर और उनका साम्राज्य समाप्त होगा । 
और वो भी नहीं बचेंगे जो हिन्दु में जन्म लेकर अपने ही जड़ में जहर घोलने का प्रयास कर रहें हैं , जैसे कौरव समाप्त हो गए जो सनातन धर्म के विधान के विरूद्ध काम किया । भगवान कृष्ण के विरूद्ध खड़ा हो गया था दुर्योधन , वो भी समाप्त हो गया । 

तो मेरी आप सभी हमारे सनातन धर्मावलंबी भाइयों से प्रार्थना है कि चिंता ना करें , विधर्मियों से उलझे नहीं । अपने भगवान की भक्ति करें , अपने महापुरुषों और संतों का , देश भक्तों का सम्मान करें । और दृढ़ आस्था रखें । दूसरे की बुराई ना करें । अपने सनातन का प्रचार करें , अपने असली संतों के बारे में और भगवान ईष्ट की चर्चा करें । सत्संग करें । 
और अपने शरीर के लिए जिविका के लिए सनातन धर्म के पथ पर चल कर कर्म करें । 
आपका भाई संजीव कुमार आज का तारिख 15 मई 2021 ( यह मेरे भगवद् चिंतन और गुरू देव से प्रदत्त तत्वज्ञान है श्री राधे )

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