Saturday, 8 May 2021

एक व्यवहारिक बात या कहिए की स्व अनुभव ।यह दृढ़ सत्य है , अटल सत्य है कि हमारा जिस विषय में गहरा रूची होता है , जिससे गहरा प्रेम होता है उसके बातों को हमेशा याद रखते है और व्यवहार में भी लाते हैं ।

एक व्यवहारिक बात या कहिए की स्व अनुभव ।
यह दृढ़ सत्य है , अटल सत्य है कि हमारा जिस विषय में गहरा रूची होता है , जिससे गहरा प्रेम होता है उसके बातों को हमेशा याद रखते है और व्यवहार में भी लाते हैं ।
संसार में भी जब हमलोग अपने पिता या माता या बहन या किसी से भी सच्चा  प्रेम करते हैं, श्रद्धा और विश्वास करते हैं  तो उनकी बातों को हमेशा याद रखते हैं और व्यवहार में भी लातें है ।
यानि संसार में भी जिस तरह  हमलोग  जितना जिस व्यक्ति , बिषय , बस्तु ,‌स्थान से प्रेम करते हैं उतना‌ ही वो याद रहता है हमेशा । या वास्तविकता तो है कि याद रखने की और व्यवहार में लाने का श्रम भी नहीं करना‌ परता , यह अपने आप याद रहता है और व्यवहार में भी आ जाता है अपने आप । बस एक हीं आधार है प्यार व प्रेम की गहराई अपने प्रेमास्पद से । 
ठीक उसी प्रकार अगर हम वास्तव में दिलों‌ जान से अपने गुरू और इष्ट से प्यार करते हैं तो उनका एक एक बात व्यवहार , आदेश , तत्त्वज्ञान , आदि उनसे प्रेम के मात्रा के अनुसार और बराबर मात्रा में याद रहता है हि रहता है और व्यवहार में भी अपने आप आता रहता है । 
भुलने का मतलब हमारा प्रेम कम है ।

जब हम किसी बात को आत्म शात कर लेतें है ठीक से तो जागते हुए हीं नहीं सोते हुए भी हमलोग उन बातों को कभी नहीं भुल सकते । और ना भुलते हैं।

संसार में पढ़ाई के दौरान गणित , भौतिकी , इतिहास भुगोल , या कोई भी शब्जेक्ट हो हम पढ़ते हैं प्रैक्टिस और व्यवहार में जब लातें है बार बार तो सोते हुए भी नहीं भुलते । वसरर्ते वो सब्जेक्ट हमारे मन को भाए । उसमें पुरा इंटरेस्ट हो और प्रैक्टिकल भी हो । 
इसलिए संसार में संसारिक ज्ञान को भी हम सोते हुए भी याद रखते है तो श्री महाराज जी के सिद्धांत को कैसे नहीं 24 सो घंटा याद रख सकते हैं । भुलने का मतलब प्यार में कमी हैं पसंद में कमी है , इंटरेस्ट में कमी है। 
उदाहरण =बचपन में प्रैटीस किया 2+2 =4 होता है तो यह बात आज तक याद है और उसको व्यवहार में लाते हैं जब कोई हिसाब करते हैं तो । किसी सोते को अचानक उठा कर पुछिए वो दो प्लस दो चार ही बोलेगा ।
पांच या छः नहीं बोलेगा कभी ।
हां जिसका प्रैटीस कच्चा है बचपन से , वो तो गलती करेगा ही जागते हुए भी । 
इसी प्रकार श्री महाराज जी के दिए गय तत्वज्ञान का प्रैक्टीस , बार बार रीभिजन और उसके बाद प्रैक्टिकल करने के बाद वो हमेशा याद रहता है । इसी प्रैक्टीकल प्रैक्टिस को साधना कहते हैं । श्री महाराज जी के सिद्धांत पर गहरा चिंतन करने से वो दिमाग में दृढ़ हो जाता है । 
हम जिससे प्यार दिल से करते हैं संसार में भी तो उसके बातों को , उसके आदत को उसके कहने बोलने के स्टाइल को हमेशा याद रखते है। 

फिर वो तो हमारे परम पिता है , वो तो हमारे ऐसे पिता है जिनको हम दिलों जान प्राण से प्यार करते हैं । तो उनके एक एक बात को कैसे ना दिमाग दृढ़ करके याद रखें भला ।
महाराज जी ने हीं कहें है कि साधकों को बार बार रीभिजन के द्वारा तत्त्वज्ञान के द्वारा दृढ़ करना चाहिए , जब यह दृढ़ हो जाएगा तो शास्त्रोक्ति यानि तत्त्वज्ञान में निपुणता से साथ शास्त्र युक्ति में भी निपुणता हासिल हो जाएगी यानि तत्वज्ञान को व्यवहार में लाने की आदत हो जाएगी । फिर होश में  तत्त्वज्ञान को कभी भुलना तो दुर वेहोशी में यानी सुसुप्ति में भी हम हमेशा याद रखेंगे और उससे अलग सोचेंगे नहीं कभी ।
तो यह तो तभी हो सकता है कि हम अपने गुरू के द्वारा दिया गए तत्वज्ञान को कितना आत्मसात किया ।
और मेरा खुद का अनुभव है कि श्री महाराज जी और अपने प्रीतम से जितना प्यार होगा हम उतना हीं उनके बातों को आत्मसात् करते हैं ।
संसार में भी देखते हैं ना आप जिससे प्यार करते हैं तो वो अगर आपके विपरीत बात बोल दे तो आप कहते हैं न कि दुनिया चाहे कुछ भी कहे तुम कुछ ऐसा वैसा बोल देते हो तो हमको बुरा लगता है ।
बस यही फार्मुला यहां भी काम करता है हम जितना जिससे प्यार करते हैं उतना हीं उसके कहे बातों को मानते हैं और हमेशा याद रखतें हैं । भुलने का मतलव‌ प्यार कच्चा है । और थोडा बहुत याद रखने का मतलब थोड़ा प्यार है । और पुरा भुलने का मतलब प्यार , श्रद्धा और विश्वास की पुरी कमी ।
श्री राधे । :- संजीव ।।

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