कलयुग जैसे जैसे बीतेगी अपना प्रभाव इस प्रकार दिखलाएगी :-
हां एक बात अवश्य होगी सभी वास्तविक तथा सच्चे धर्मनिष्ठ तथा भगवद् भक्त , वास्तविक संतों में आस्था रखने वाले जीवात्मा अपने ईष्ट और गुरू के लोक में निवास करने चले जाएंगे , उनको कलयुग के ताप से मुक्ति पहले ही मिल जाएगी । जो हमारे गुरूदेव श्री कृपालु जी महाराज या कुछ वर्तमान वास्तविक संतों के प्रति पूर्ण रूप से आस्थावान होंगे, श्रद्धावान होंगे , वे सभी मनुष्य इन घोर कलयुग के लक्षण के प्रकट होने से पहले दिव्य लोक , अपने गुरू के लोक चले जाएंगे, लेकिन जो दुष्ट प्रकृति के होंगे, उनको कलयूग का प्रभाव झेलने के लिए कलयुग में कई कई बार जन्म लेना होगा और इन कठीन पीड़ा से बार बार मरना होगा, गुजड़ना होगा यह एक अटूट सत्य है ।
1. कलयुग में मनुष्य का आत्मबल गिरने लगेगा । लोग आलसी , भोगी तथा अति विलाशी होंगे ।
2. मनुष्य झूठ पर भरोसा करेंगे और सच को स्वीकार करने से परहेज़ करेंगे । सच पर ऊंगली उठाएंगे और झूठ को गले लगायेंगे । सही रास्ता दिखाने सत्य बोलने वाला , सन्मार्ग का बात करने वाला कटु प्रतित होगा , दुश्मन कि तरह नजर आएगा और गलत मार्ग पर ले जाने वाले का लोग संगति करेंगे । गलत लोगों को लोग अपना आदर्श मानेगें , नेता मानेंगे । जो जितना चिल्लाएगा , चीख चीख कर बातें करेगा वो उतना पसंद किया जाएगा ।
3. मानव समाज , परिवार में आपसी सहयोग तथा संबंध का आभाव होगा । परिवारिक रिस्तों का कोई अहमियत नहीं होगा , झूठ , बनावट , छल , प्रपंच , इर्ष्या द्वेष से लोगों का मन भरा परा होगा । वाणी में सौम्यता के जगह जहरीले व्यंग होंगे ।
4. मनुष्य का कद काठी बौना होता जाएगा । स्त्री स्त्री से और पुरूष पुरूष से अप्राकृतिक तथा अमर्यादित व्यवहार तथा यौनाचार करेंगे । पुरूष से पुरूषत्व एवं नारी से नारित्व समाप्त हो जाएंगे । वेश्याएं पुजी जाएगीं , उनका मंदिर बनेगा । अंग प्रदर्शन स्टेटस सिंबल बन जाएगा । असली देवी देवताओं का मंदिर खंडित होंगे । जुआ शराब सम्मान का बिषय होगा । मानवीय अंगों का तस्करी तथा व्यापार होगा ।
5. मानवों में आसुरी वृत्ति का लक्षण उत्तरोत्तर दृष्टिगोचर होंगें , जो जितना झूठ बोलेगा , जितना कुकर्म करेगा , अमर्यादित तथा अमानवीय व्यवहार करेगा उसका उतना बड़ा नाम होगा । समाज में पद होगा ।
6. धन के लिए पिता पुत्र का तथा पुत्र पिता का , भाई बहन का तथा बहन भाई का , पति पत्नी का तथा पत्नी पति को धोखा देगा, मर्डर करेगा । एक स्त्री का अनेकों से संबंध होगा उसी प्रकार एक पुरूष का अनेकों से शारीरिक संबंध होगा , यहां तक कि जानवर तक से ।
7. फर्जी साधुओं का लोग चरण चुमेंगे और हाथ कि सफाई बाले बाबाओं के द्वारा दिखलाए गए चमत्कार को नमस्कार करेगे । उनके यहां कड़ोरो कि भीड़ होगी और वास्तविक संतों को शंका के दृष्टि से लोग देखेंगे । वास्तविक संतों का अपमान होगा । शास्त्रों का अपमान होगा और फर्जी तथा बात बनाने बाले साधुओं के यहां , चमत्कार दिखाकर लोगों को ठगने बाले बाबाओं के यहां लोग जाकर खूद को आध्यात्मिक दिखने तथा होने का दावा करेंगे ।
8. हर खाने कि बस्तू दूषित तथा मिलावटी होगा । खान पान जहरीली लेकिन आकर्षक दिखेंगी । नए नए लेकिन जहरीले पकवानों का अविष्कार होगा । अधिकांश लोग मांसाहारी होंगे , मानव का भी मांस पका कर खाएंगे । घरों में रसोई घर तथा स्नान घर नहीं होंगे , भोजन तथा जल के लिए एजेंसी होगी । स्नान के लिए वाशिंग मशीन के तरह वाथ मशीन होगा ।
9. मानव शरीर एक से अधिक रोगो का घर होगा , दवा के नाम पर जहर और बैद् के नाम पर डकैत डाक्टर होगा ।
10. लोगों की याद्दाश्त शक्ति अति अल्प होगी , मनुष्य मनुष्य से दूर तथा जानवरों के साथ एक ही विस्तर पर सोयेगे ।
11. कलयुग में इंसान से इंसानियत गायब होती चली जाएगी , मनुष्य से मानवता समाप्त होती जाएगी लोग वहशी होंगें । साधुओं में साधुता नहीं होगी या दिखावटी होगी । देश धर्म , राष्ट्र धर्म निभाने वालों का आभाव होगा । धर्म , न्याय नीति , नैतिकता पर धन हावी होगा । अधिकतर धार्मिक संस्थानों में धन वाले का सम्मान होगा और निर्धनों का प्रवेश वर्जित होगा । इन्हें भंगी समझा जाएगा ।
12. कलयुग में धर्म कर्म के नाम पर कुकर्म होगा । तीर्थ में व्यभिचार होंगे , यौनाचार होंगे ।
13. निति, नैतिकता न्याय का कोई जगह नहीं होगी ।
14. फुलों से खुशबू , मसालों से उसका स्वाद , औषधी से उसका औषधीय गुण , यानि रोग निरोधक प्रभाव समाप्त होते चला जाएगा ।
15. अनेक नए नए रोग उत्पन्न होगा जो लोगों को काल के मुख में भेजेगा ।
16. खेत से उपजाऊपन , अन्न से अन्नरस , वृक्षों से फल देने कि क्षमता , गाए से दुध, उत्पादन कि क्षमता समाप्त होने लगेगी ।
17. तरह तरह के विध्वंशक विनाशकारी हथियार का निर्माण होगा जो स्वयं के विनाश का कारण होगा ।
18. अति वृष्टि, अनावृष्टि, जलजला , भयानक से भयानक तुफान , भयानक बाढ़ तथा सुनामी जल्द जल्द उत्पन्न होगा । पहाड़ दड़कने लगेगा , वर्फ का पहाड़ तेजी से पिघलने लगेगा । रेगिस्तान का क्षेत्रफल बढ़ने लगेगा । दिन का समय छोटा होगा , रातें बड़ी होंगी ।
19. मशीन में बच्चे पैदा होंगे , गर्भ धारण करना एक इतिहास बन जाएगा ।
विचार विवेक बुद्धि हीन बच्चे पैदा होंगे , उनका दिमाग मशीनी होगा जो भावनात्मक शून्य होंगे , संस्कार , चरित्र आदि शब्द लुप्त हो जाएंगे । बच्चा जो अपने पैर पर खड़े होते ही मां वाप को पशुओं के तरह छोड़ कर अलग हो जाएंगे हमेशा के लिए ।
20. वाइलोजिकल जरूरत जैसे सेक्स , नींद , सांसें तथा भोजन आदि को मशीन से पुरा करेंगे , लोग संवेदनहीन होंगे ।
21. मनोरंजन के विशुद्ध साधन के जगह लोग अमार्यादित नृत्य संगीत , तथा नाटक से अपना रंजन करेंगे ।
22. असली नकली का पहचान लोगों को नहीं होगा । कलयूग का दस हजार सात सौ साल वितने के साथ हीं मानव सभ्यता लुप्त हो जाएगा, पर ग्रही जीवों का आक्रमण होगा , सबकुछ तहस नहस हो जाएगा पृथ्वी पर । पृथ्वी पर केवल भोग योनि के जीव कीट पतंग तथा जानवरों का शासन होगा , सभी अधर्मी मानव जानवर शरीर में जन्म लेंगे कर्म भोग के लिए , ये जानवर कुछ कुछ मनुष्य कि तरह दिखेंगे । पृथ्वी पर जानवरों का शासन चार लाख तिरेपन हजार तीन सौ बर्ष तक रहेगा , उसके बाद पृथ्वी समाप्त ।
23. रिस्तों में वाणी कि मधुरता के जगह कर्कशता का समावेश होगा । दर्पण झूठ बोलेगी ।
24. वेद शास्त्र, असली संत , फल तथा छाया प्रदान करने वाले बृक्ष एवं निर्मल सरिता नदी तालाब लूप्त हो जाएंगे । शास्त्रों को तोड मोड़ कर पेश करेंगे बहुरूपिए पंडित । बड़ी संख्या में ब्राह्मण मांस भक्षि होंगे । चंडाल प्रवचन करेंगे । अधिकतर ब्राह्मण उसका चरण धोकर पिएंगे , उनको अपना आदर्श मानेगें । शास्त्रों के नाम पर चंडाल मिथ्या प्रवचन करेंगे ।
25. लोग या तो जमीन के निचे चुहे कि तरह या गगन चुंबी इमारत में कबुतर के भांति निवास करेंगे और सर्दी एवं गर्मी से उम्र कमतर होगी । शरीर दुर्बल होगी । लोग हवा में उड़ेंगे ।
अंत में ब्रह्मांड कि गति अनियमित तथा अनियंत्रित हो जाएगी एवं एक भयानक विस्फोट होगा ब्रह्मांड में , ग्रह से ग्रह टकराएंगे और सृष्टि का महाप्रलय होगा ।
हां एक बात अवश्य होगी सभी वास्तविक तथा सच्चे धर्मनिष्ठ तथा भगवद् भक्त , वास्तविक संतों में आस्था रखने वाले जीवात्मा अपने ईष्ट और गुरू के लोक में निवास करने चले जाएंगे कल्युग के प्रारंभिक अवस्था में ही , उनको कलयुग के इन तापों से , घटनाओं से मुक्ति पहले ही मिल जाएगी ।
:- सोर्स - पद्म पुराण , गरूड़ पुराण एवं भविष्य पुराण ।
यह सभी बातें सत् प्रतिसत होके रहेगी । कुछ कुछ दिखने भी लगा है आजकल ।
:- संजीव कुमार ।
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