फिर थोड़ी देर चार पांच सेकेंड चुप रहने के बाद श्री महाराज जी ने फिर आगे कहा कल एक ने विदेश से मुझे फोन किया - श्री महाराज जी आई लव यू , आइ मिस यू टू मच ! आप कैसे हैं महाराज जी ? मैंने कहा मैं ठीक हूं, तुम कैसी हो ? उसने कहा मैं भी आपके कृपा से विल्कूल ठीक हूं , घर में भी सब लोग आपकी कृपा से ठीक है ।
तो मैंने भी कहा आई आल्सो लव यू । फिर मैंने कहा अगर मुझे मिस करती हो तो ऐसा करो मैंने एक महिने की साधना रखी है मनगढ़ में तो तुम आ जाओ ! उसने कहा महाराज जी वो वो वो वो ऐसा है महाराज जी कि मेरी बेटी को बेबी हुआ है पिछले महीने , वो मेरे पास आकर रहने वाली है कुछ दिन , इसलिए महराज जी मुझे कुछ दिन उसका हेल्प करना है , मैं नहीं आ सकूंगी । तो मैंने भी कह दिया ओके ठीक है । और फोन रख दिया ।
तो ए शब्दों का प्रेम है, लोग मुझे मुख से बोल देते हैं आई लव यू , आंखों में वो मोटे मोटे आंसूओं के साथ । ए सब एक्टिंग है , तो मैं भी शब्दों से बोल देता हूं उनको आइ लव यू टू , मै भी एक्टिंग कर देता हूं ।
वो एक्टिंग कर रहा है तो मैं भी एक्टिंग कर देता हूं , करना परता है ।
मैं जानता हूं उसको प्यार वार नहीं है, मुझसे कोई अटैचमेंट नहीं है । अटैचमेंट तो उसको अपने बेटा बेटी , नाती पोते से है ।
जिसको सचमुच गुरू से भगवान से प्रेम होगा वो मुंह से भले न बोले आई लव यू लेकिन वो अंदर ही अंदर प्यार करेगा , दुर बैठा है लेकिन उसका मन केवल मुझमें है, भगवान में है ।
फिर श्री महाराज जी ने आगे कहा । बेटी है उसको अपनी मां से प्यार है , उसकी शादी हो गई , वो चली गई ससुराल वहां से मम्मी को फोन करती है मम्मी आई लव यू , आई मिस यू , मम्मी पापा भी खुश देखो ये मुझसे कितना प्यार करती है , आइ लव यू टू बेटा । दोनों के आंखों में वो मोटे मोटे आंसू हैं ।
कुछ साल बाद बेटी को एक दो बच्चा- वच्चा हो गया, वो व्यस्त हो गई । अब उसको फुर्सत नहीं मम्मी से बात करने के लिए, महीने में कभी एक-आध बार बात करके , मम्मी को कहा आई लव यू , मम्मी ने भी कहा आई लव यू टू , फिर उसने पुछा मम्मी तुम कैसी हो ? मम्मी ने कहा कुछ दिनों से तबियत ठीक नहीं, डौक्टर ने कहा है बेड से नहीं उठने के लिए कुछ दिन तक , तुम आ जाओ , मुझे तुम्हारी हेल्प की आवश्यकता है !
बेटी कहती हैं मां कैसे आऊं मैं , सोनु मोनु को देखना पड़ता है , बहुत चंचल है , तैयार करके स्कूल भेजना पड़ता है , उनका भी आज कल प्रोजेक्ट चल रहा है वो औफिस में व्यस्त रहते हैं , उनको भी अभी मुझे समय पर खाना ऊना बना कर देना पड़ता है । तुम ऐसा करो एक फुल टाइम दाई रख लो । कुछ दिन की ही बात है, ठीक हो जाओगी ।
ये लो । तो कहां गया वो आई लव यूं ???
तो ये सब शब्दों से प्यार का एक्टिंग है, और आंसू भी एक्टिंग में लोग खुब बहाते हैं । और लोग ऐसा ही एक्टिंग यहां मेरे साथ भी करते हैं तो मैं भी उनके साथ एक्टिंग कर देता हूं प्यार का । लेकिन यह अटैचमेंट नहीं है , प्रेम नहीं है , यह छल है , भ्रम है , धोखा है जो वो खुद को दे रहा है ।
जिससे सबसे ज्यादा अटैचमेंट जीव का रहता है, जीव को प्रेम भी उसी से होता है सबसे ज्यादा । और जिससे स्वार्थ अधिक है उसी से अधिक अटैचमेंट भी है जीव का , सीधी सी बात है । जिससे जितने मात्रा का स्वार्थ है जीव का उसी मात्रा का उससे प्रेम है , स्वार्थ खत्म प्रेम खत्म । तो इसको प्रेम नहीं व्यापार कहते है ।
तो अटैचमेंट अगर मुझसे सबसे ज्यादा रहता तो केवल मुख से आई लव यू महाराज जी , नहीं बोलते । अटैचमेंट तो अपने पति बेटे तथा नाती पोते से है । और मुझसे मुख से बोल रहा है आइ लव यूं । तो इससे कोई लाभ नहीं ।
जिसका लव वास्तव में होता है वो मुख से आई लव यू कभी नहीं बोलेगा ।
जो सचमुच भीतर से प्यार करता है भगवान और गुरू से , वो बाहर प्रदर्शित नहीं करता कभी । संसार में एक दुसरे से एक्टिंग करते करते लोग वही एक्टिंग भगवान और गुरू के साथ भी करते हैं तो भगवान और गुरू भी उनके साथ एक्टिंग कर देता है ।
श्री राधे ।
:- श्री महाराज जी के मुख से सुनी हुई वाणी ।
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