वास्तविक संत क्यों कहते हैं मत उलझो इसमें । यह सब इस पोस्ट से क्लियर हो जाएगा , अगर ध्यान से पढ़ें तो।
तो सबसे पहले समझिए जब हम यात्रा करते हैं तो रस्ते में माइल स्टोन देखा होगा आपने ।
वो हमें दुरियां बताता है कितना चल चुके और आगे किधर चलना है , जगह भी बताता है उस जगह का प्रभाव , प्रकृति , वहां का सब परिस्थितियां , वातावरण ।
यह माईल स्टोन को ग्रह, नक्षत्र, दशा , अंतर दशा , प्रत्यंतर दशा , सूक्ष्म दशा के और इनके बीच की दुरी समय का अंतराल मान लिजिय ।
अब आप कन्याकुमारी से चले , यानि जहां आपका हमारा जन्म हुआ , उस समय वहां के माईल स्टोन से चलना प्रारंभ किये ।
( कन्याकुमारी एक उदाहरण है , कोई मदुरई में जन्म लिया तो वहां का माईल स्टोन यात्रा के आरंभ का कुंडली बन गया , जो चे़न्नई में जन्म लिया वहा का माईल स्टोन अलग हैं ।
और उसी माईल स्टोन को ग्रह नक्षत्र दशा महादशा आदि मान लिजिए ।
अब जन्म लिय हम , उस समय जिस माईल स्टोन के बीच थे वो हमारा कुंडली बन गया ।
और हां जन्म तो मिला पिछले संचित कर्मों के अनुसार , हमारे प्रारब्ध के अनुसार , ऊंच घर में गरीब घर में समृद्ध घर में लाखो प्रकार के घर स्थान और समय में
ठीक जन्म के समय की स्थिति में ग्रह यानि माईल स्टोन कुंडली बन गया ।
अब हमें अपने पिछले कर्मो का फल मिलना शुरू हो गया जन्म लेते हीं। कोई जन्म के समय मर गया , कोई इंटेलिजेंट और स्वस्थ पैदा हुआ । कोई विकलांग तमाम प्रकार के ।
अब बच्चा है वो कर्म नहीं कर सकता उसको होश नहीं । तो पहले वो भोगता है अच्छा या बुरा जो भी अपने प्रारब्ध से । पर जीवन यात्रा शुरू हो चुकी जन्म के साथ हीं जीरो माइल से , समय के चक्र शुरू महादशा अंतर दशा गोचर शुरू ।
कुछ दिन में होश हुआ , मन सोचना शुरू किया , ज्ञान हुआ , अब भोग के साथ कर्म शुरू , माईल स्टोन, यात्रा के साथ बदल रहा है । उसे हीं महादशा ,अंतर दशा, प्रत्यंतर दशा , सूक्षम दशा समय का पहिया गोचर है सब सांकेतिक है पर है माईल स्टोन और पहिया , उस पहीये में हव है स्पोक है और उसका गणना है , गति है ।
तो वो माईल स्टोन हमारे पिछले कर्मों के फल का आइडिया देता है , ना कि हम कर्म क्या कर रहे हैं वो और आगे क्या करने वाला हैं वो , कर्म की स्वतंत्रता हमें मिला है । कर्म करने का प्लान बनाने , सोचने और करने में मनुष्य स्वतंत्र है । इसलिए आगे कर्मो का यानि क्रियामान और आगे का हमारे द्वारा किया जाने वाला कर्म , हमारे पिछे के अच्छे और बुरे फल में बृद्धि यह कमी लाने बाला है उत्पेरक है । अच्छा करेंगे तो बुरे फल कि तीव्रता कम होगी । और यदि बुरा किया तो बुरे फल कि तीव्रता और बढ़ेगी ।
हम आगे क्या करेंगे या अभी क्या करेंगे वो भगवान भी नहीं बता सकते हैं न जानते हैं । ज्योतिष की तो बात ही छोड़िए ।
ज्योतिष से बस इतना पता चलता है कि हम क्या कैसा फल भोगे पिछले सभी माईल स्टोन के बीच जहां से चले थे इस जीवन यात्रा में और आगे क्या भोगेंगे पिछले कर्मों के फल के रूप में वो केवल पता चलता हैं वो भी आज के किये कर्म के हिसाब तक ।
बस इतना हीं इससे अधिक कुछ भी नहीं ।
और एक सबसे बड़ी खास बात कि मान लिजिए पिछले कर्मों के अनुसार हमको जेल जाना लिखा है , ग्रह दशा , गोचर , अंतर दशा सब बता रहा है । पर हम जान गए सही सही जानकार ज्योतिष से की हमारा बुरा समय चल रहा है या अच्छा चल रहा है और बुरा आने वाला है , हम जेल जाने वाले हैं घोटाला किये है पहले , चोरी किया है सताया है किसी को । उसके फल के रूप में हमको खडाब फल पर मिलने का योग है भविष्य में इतने से इतने माईल स्टोन के बिच आगे कि यात्रा में , और मान लिजिए हमको जेल जाने का तीव्र योग है और ज्योतिष बता रहा है तो हम अगर सजा से बचना चाहते हैं या सजा कम मिले तो हमको करना क्या चाहिए ।
तो वो अगर सही ज्योतिष है तो कहेगा जाके सरकार के सामने सरेंडर हो जाइए ।
आगे आगे अभी जाकर इनकम टैक्स के सामने सरेंडर कर दें । और बोलिए मालिक गलती हो गई , हमने गुणाह किया है , कानून का पालन नहीं किया वो ये लिजिए चुराया धन , और माफ कर दिजिए हमको ।
तो यह कर्म किया । कर्म योनि है ना तो अच्छा कर्म कर लिया तुरंत , तुरंत सरेंडर कर दिया , अब सरकार थोड़ा बहुत सजा दे के फाइन करके माफ कर दिया ।
फल भोगना था, जेल का हवा खाना था आगे भविष्य में , ग्रह दशा सब बता रहा था । पर सचेत हो गये हम । और अच्छा उपाय किया , अच्छा ज्योतिष बता दिया कि ये फल मिलने वाला है , जाकर सरेंडर कर दो तुरंत । आप सरेंडर कर दिए , थोड़ा फाइन उन हुआ और आप बच गए ।
तो यह फायदा हुआ ज्योतिष ज्ञान से ।
लेकिन आज बहुत सारे ज्योतिष करते क्या हैं? तो बता देंगे की आपको जेल मिलने का योग है । पर उपाय के नाम पर कहेंगे आप रूद्राक्ष पहन लो , हीरा पहन लो , मोती पहन लो निलम पहन लो। हमसे प्राण प्रतिष्ठित यह चीज ले लो । और एक बड़ा रकम हमको दे दे दो । यानि एक तो आपने गलत काम किया । उसको वो जान कर अब आपको लुट रहा है , वो आपसे भी भारी चोर है , आप चोरी किये हैं , वो जान गया , वो नंबरी गुंडा उपर से 😀😀 , उसको ज्ञान है ज्योतिष शास्त्र का , लेकिन वो क्या कर रहा है तो वो आपका सरदार बन गया अब । ऐ तुमको हम बचा देंगें , ग्रह को घुमा देगें😂😀😀
ये जाप करो , ये पुजा , हवन करो , ये पत्थर पहनो , यह करो, वह करो , इतना खर्च करो । यानि चोर चोर मौसेरा भाई आपका भाई बन गया आपका सीक्रेट्स जान गया ।
अब आपको डरा रहा है फिर जो धन आप लुटे गलत काम कर चुके है वो आपसे हिस्सेदारी मांग लिया ।
और जब वो समय आया तो आप गय जेल क्योंकि एक तो पाप किया आप पहले , उपर से उसको और छुपाया , और भी भारी पाप किया , डबल ।
आप हतप्रभ । कुछ काम नहीं आया । अरे आएगा कैसे । एक तो पाप कर चुके हैं और दुसरा पापी आके आपको सही सलाह न देकर आपको और छुपाने का पाप करा दिया ।
सही ज्योतिष होता तो कहता भाई देख तुमने गलत काम किया है कोई उपाय काम नहीं देगा । तुमको भविष्य में या अभी यह सजा मिली है ।
तुम्हरा किया गया पाप हीं शनी बन गया है और वो भी नीच का शनी, खडाब शनी , वक्री । अच्छा किये रहते तुम अगर, तो शनी यानि फल शुभदायक होता तुम्हारे लिए , सब तरह का अच्छा शनी रूपी फल मिलता तुमको । पर किया गलत इसलिए तुम्हारे उपर क्रूर शनी जो तुम्हारे कर्मो के फल के रूप में खड़ा है आने वाले समय में वो बड़ा खतरनाक है । भाई एक हीं रस्ता है जाके सरेंडर कर दें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सामने , सजा कम हो जाएगा । लेकिन चुंकि वो ज्योतिष गलत है इसलिए
वो लुट के चल दिया वो आगे मिलेगा उसको भी सजा । पर आप तो नहीं बचने बाले फिलहाल ।
इसलिए संत लोग कहते हैं कि छोड़ो ज्योतिष का चक्कर , तुम आज से अच्छा काम करो, वो न सताओ किसी को , न अपमान करो किसी का , किसी को दूख मत दो आज से , पड़ पीड़ा सम नहीं अधमाई । और भगवान का नाम लो आज से सही सही , और आज से शुभ कर्म करना शुरू कर दो । सब सजा कम हो जाऐगा आगे का अगर खडाब समय आने वाला होगा तो ।
और अगर अच्छा समय आगे आने वाला होगा तुम्हारा तो और भी अच्छा अच्छा हो के आएगा ।
और छोटी गरबरी किया है पहले तो उसका फल भी मिट भी सकता हैं । तो यह है थोड़ा आईडिया जो मैंने आपको दिया है , गहरी बात समझना संभव नही छोटे से पोस्ट में । यह वृहत बिषय हैं ।
हां एक बात समझ लिजिए एक अच्छा ज्योतिष आपको अच्छा बनने का सलाह देगा । शुभ कर्म का सलाह ।
और अपने आजिविका को चलाने के लिय वाजिब फीस लेगा केवल , क्योंकि वही उसकी आजिविका का साधन है वेचारे का । हर तरफ से नहीं लुटेगा आपको ।
श्री राधे :- आपका संजीव ।
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