Saturday, 3 February 2024

कुछ बनाना ही हो तो मुझे विभिषण बना देना जो अधर्म के साथ युद्ध में अगर मेरा भाई और समाज भी विधर्मी हो तो मैं उसे त्याग कर आपके पक्ष में खड़ा रहुं ।

हे महाप्रभु मुझे कभी भी भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य तथा कर्ण बनने कि शिक्षा और प्रेरणा नहीं देना ,जो आपका भक्त होते हुए भी या तो विधर्मियों के साथ खड़ा था या तो मुक दर्शक था !
 कुछ बनाना ही हो तो मुझे विभिषण बना देना जो अधर्म के साथ युद्ध में अगर मेरा भाई और समाज भी विधर्मी हो तो मैं उसे त्याग कर आपके पक्ष में खड़ा रहुं ।
अगर विभिषण भी नहीं बनाने कि इच्छा हो तो मुझे बानर , भालु या रीछ बना देना जो मैं आपके निमित्त ही आपके पक्ष में अधर्म से युद्ध लड़ूं और आपके प्रति मैं अपना छोटा ही सही पर योगदान दे सकूँ ! 
हे प्रभु अगर ये सब भी नहीं बनाना है तो जटायु कि तरह एक पक्षी बना देना जो अपनी मां सीता के निमित्त अधर्मी से युद्ध करके आपके निमित्त शहीद हो जाऊं । 
हे महाप्रभु अगर इसके भी योग्य मुझे ना समझो तो मुझे वो गिलहरी बना देना जो आपके निमित्त राम सेतु बन्धन में दो छोटा पत्थर डाल के आपके प्रति अपना फर्ज और उत्तरदायित्व पुरा करके अपने जीवन को सार्थक कर सकूं ।

हे महाप्रभु कृपालु जू सरकार मुझे स्वार्थी भक्त कभी नहीं बनाना , मुझे ऐसा भक्त बनने का वरदान कभी मत देना जो अपने सुख और आनंद के निम्मित आपकी भक्ति करें ! 
मुझे तो ऐसा भक्त बनने का वर दो जिससे मेरा जीवन आपके काम आ सके । मेरे खून का कतरा कतरा आप पर बलि बलि जाए । मेरे खून का कतरा कतरा आप पर निक्षावर हो सके । आपके हर अवतार में आपके तथा आपके सनातन धर्म तथा सिद्धांतों के निम्मित सेवा करते करते अपना प्राण , तन मन धन निक्षावर कर सकूं । मैं मरूं तो सिर्फ आपके निम्मित और जिऊं तो सिर्फ आपके सेवा के खातिर तथा आपके सनातन वैदिक धर्म के उत्थान में योगदान के खातिर । आपकी कृपा से मुझे बोध हो गया है कि आपके सकाम सेवा में सुख नहीं , वल्कि आपकी निष्काम सेवा ही धर्म है, सुख और आनंद है । 
"गुरू सेवा हीं धर्म हमारो , दास न हम श्रूतिचारि के । 
ठाकुर युगल किशोर हमारो , चाकर हम पिय प्यारी के "।। 
जय जय सियाराम । :- आपका कृपा आकांक्षी आपका पुत्र संजीव कुमार ।

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