क्योंकि हमारे भारत के अधिकांशत: हमारे हिन्दू भाई बहन लोग हिन्दू संस्कृति, सनातन धर्म, सांस्कृतिक विरासत के प्रति उदासीन है , लापरवाह है , या विरोधी है , यहां तक कि अपने हीं हिन्दू देवी देवता तथा संतों , महापुरुषों के अपमान करने , अपमान सुनने , सुनकर शांत बैठने में पुरे विश्व में अग्रगणी है ।
हिन्दू का सबसे बड़ा दुश्मन स्वयं हिन्दू हीं है । अत: इन अपराधों के परिणामस्वरूप फल के रूप से दैविक शक्तियों के द्वारा दिए गए परिणामों से तीनों रूपों से पिड़ित हैं और रहेंगे ।
आध्यात्मिक ताप , भौतिक ताप तथा दैविक तापों से ग्रस्त हैं और रहेंगे ।
हमारे हिन्दू बाहुल्य देश में जितना आक्रमण विदेशी आक्रांताओं का हुआ उतना किसी देश में नहीं हुआ ।
विदेशी आक्रांताओं ने हमारे भारत में आकर हमें लूटा , हमारे बहु बेटियों के अस्मिता को लुटा , हमारे तीर्थों और मंदिरों को लुटा , ध्वस्त किया , उस पर मस्जिदें बनवाई , और हमारे तथाकथित क्षूद्र प्रकृति के गद्दार हिन्दू भाई या तो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे या उनसे जाकर दोस्ती कर ली , उनसे संबंध स्थापित किया , उन आक्रांताओं को यहां बसने में , राज करने में मदद की । और आज भी विधर्मियों को राज करने में मदद कर रहे हैं । अत: गद्दार हिन्दू ही इन सबके लिए सबसे पहले दोषी है ।
आज भी कुछ राज्य इसका उदाहरण है जहां विधर्मियों ने खुलेआम हमारे सनातन वैदिक धर्म को , सांस्कृतिक विरासत तथा रीति-रिवाजों पर तीखा प्रहार करते हैं और वहां अधिसंख्य क्षूद्र स्वभाव के , दुष्ट स्वभाव के गद्दार हिन्दू ताली बजाते हैं , उनको अपना बहुमूल्य वोट देकर ताकत देते हैं । यही हमारे देश का दुर्भाग्य है ।
अगर अब भी नहीं चेतोगे तो एक एक के घर घुस कर वो लोग तुम्हारे बहु बेटियों को लुटेंगे और तुम ताली बजाओगे , यह दिन फिर दुर नहीं है ।
बड़े आश्चर्य कि बात है हमारे देश में नास्तिकों की फौज है और वो भी हिन्दूओं कि , आज विदेश में अधिक संख्या में विदेशी लोग सनातन वैदिक धर्म की ओर तेजी से रूख कर रहे हैं लेकिन हमारे देश के अधिसंख्यक हिन्दू गर्त की ओर बढ़ रहे हैं ।
इन सबका विनाश नियती ने तय कर रखा है वो अवश्य होगा । यह एक ध्रुव सत्य है यह नोट कर लिया जाए ।
कितने आश्चर्य की बात है कि कुछ स्वघोषित जगद्गुरु कालनेमी तथा मारिच के रूप में बहुरूपिए हमारे देश में वास्तविक संतों तथा महापुरुषों पर ऊंगली उठाते हैं और देश का हिन्दू समाज ताली बजाता है ।
यह पाप कहां जाएगा ?
इतिहास गवाह है रावण का साम्राज्य , कंश का साम्राज्य, हिरण्यकश्यप तथा हिरण्याक्ष तथा उनके वंशज , जरासंध और शिशुपाल का साम्राज्य, कौरवों का साम्राज्य तथा उनके वंशज बुरी तरह समाप्त हो गए , महाकाल के ग्रास बन गए ऐसे ही अधर्म के कारण और अधर्मी को साथ देने के परिणाम स्वरूप ।
अग्नी शायनी द्रोपदी के चिर हरण के समय जो लोग मुक दर्शक बन कर दर्शक दीर्घा में बैठे रहे वो भी बुरी तरह मारे गए ।
फिर भी आज के अधिकांश हिन्दू यह सब देख कर अकर्मण्य बने हुए हैं मुक दर्शक बने हुए हैं , और अधिकांश तो विधर्मियों के साथ है । इन सबकी क्या दशा होने वाली है भविष्य में वो इतिहास में ही निहित है ।
मुझे तो दिखाई दे रहा है ।
एक बार फिर महाभारत से भी बड़ा विनाशकारी युद्ध , प्राकृतिक आपदा , विध्वंशक घटना बहुत जल्द घटने वाली है इसी सदी में । जिसमें बड़ी संख्या में महाविनाश होने वाला है ।
अभी तो छोटी मोटी घटना घटी है कोरोना का केवल , टेलर था , जब एक अदृश्य वायरस ने कितने परिवारों को लील गया जो एक संकेत मात्र है कि अभी भी वक्त है सुधर जाओं नहीं तो मानव शरीर बुरी तरह से छीन लिया जाएगा और फिर नहीं मिलेगा दुबारा ।
फिर कल्पो तक निकृष्ट शरीर में पड़े रहोगे ।
ए आपका विरोधी स्वाभाव , गंदी सोंच, कलुषित विचार, घटिया कर्म ले डूबेगा तुम्हें ।
प्रकृति और भगवान से अधिक ताकतवर तुम नहीं हो । अपनी दो अंगुलियों कि खोपड़ी से जो सोंच रहे हो वो सत्य नहीं है । कुतर्क वितर्क अतितर्क सबका फल अवश्य मिलेगा ।
अभी तो गदही और गद्हा के जवानी के जोश की तरह नशे में हो , जब इसका परिणाम भुगतना होगा तब पता चलेगा , जब सनातन वैदिक धर्म , हिन्दू देवी देवता और वास्तविक संतों का अपमान कर रहे थे , या होता देख कर ताली बजा रहे थे या भीष्म, द्रोणाचार्य, धृतराष्ट्र तथा गंधारी की तरह बहरे और गुंगे बने हूए थे तब क्यों नहीं सोंचा !
मैं तो जब भी इस तरह के अपमान की घटना देखता हुं तब तब अपने ईष्ट और गुरू के सामने रोता हुं , फरियाद करता हुं अपार कष्ट और दुख के साथ कि हे प्रभो अब जल्दी करो । आज करोड़ों दुर्योधन है हमारे समाज में, हमारे देश में , तुमने तो एक दुर्योधन के पाप से त्रस्त अपने जनों के रक्षा के लिए महाभारत जैसा युद्ध होने दिया और स्वयं धर्म के साथ खड़े रहे ।
आज तो अधिकांश हिन्दू दुर्योधन बन कर अपने ही संतों और महापुरुषों का , अपने ही धर्मों का केवल अपमान ही नहीं कर रहे हैं वल्कि उनका साथ दे रहे हैं । तो
भगवान मुझे संकेत देते हैं कि मत रो , ऐसे लोग स्वयं अपने विनाश को बुला रहे हैं जो अवश्य संभावित है मेरे पुत्र । एक बार फिर सबसे पहले भीष्म , द्रोणाचार्य और कृपाचार्य , कर्ण जैसे लोगों का विनाश सबसे पहले होने वाला है , दुर्योधन से पहले , क्योंकि ये तत्वज्ञानी तथा भगवान का भक्त होने के बाबजूद विधर्मी दुर्योधन के साथ खरा है एक बार फिर ।
भगवान के इसी सांत्वना के बल पर मै आश्वस्त हुं कि सभी विधर्मी अबकी बार फिर महाकाल का ग्रास बनने बाले है और यह भारत कि बसुंधरा पाप तथा पापियों के बोझ से उत्तीर्ण होने वाली है एक बार फिर ।
जय जय सियाराम , जय महाकाल , महाकालो के काल , जय महाकाली अपने देव भूमि भारत की रक्षा करो ।
जय जय श्री राधे ।
:- संजीव कुमार।
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