Wednesday, 7 February 2024

मेरी कविता :- लक्ष्य को पाने के खातिर ऐ मुसाफिर तू तो चल

मेरी कविता :- 
लक्ष्य को पाने के खातिर 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
रास्ते हो लाख दुर्गम
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 

राह में कितने भी कांटे
हौसलों में प्राण फुंके 
कर्म के खुशबू बिखेरे 
धर्म पथ पर चाहे अकेले
इष्ट हर क्षण साथ तेरे
भक्ति का संगित गाता 
भक्ति पथ पर तू तो चल
 ऐ मुसाफिर तू तो चल
सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 

आसमां में घटा घेरे 
लाख तुफां आके घेरे
प्राण की बाजी लगाए 
कर्तव्य पथ पर तू तो चल 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 

गम न कर ठोकर लगे जब
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
असफलताओं से सीखे
देख न मुड़ करके पीछे
दुर्गमें हो लाख घाटी 
राह में ऊंचे पहाड़ 
आशाओं के दीपक जलाए
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 

मंजिलें अवश्य मिलेगी 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
तुमको तेरा राम मिलेंगे 
ऐ मुसाफिर तुम तो चल 
सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
बैठ न थक करके पीछे 
ऐ मुसाफिर तू तो चल
 सिर्फ चलना तेरे वश में 
ऐ मुसाफिर तू तो चल 
चलते रहना ही है जीवन
ऐ मुसाफिर तू तो चल
।।‌ :- मेरी कविता , संजीव कुमार

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