Thursday, 20 July 2023

120 करोड़ से अधिक हिन्दू आबादी वाला हिंदूस्तान हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं 🤔🚩

एक व्यक्ति का प्रश्न :- 
120 करोड़ से अधिक हिन्दू आबादी वाला हिंदूस्तान हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं 🤔🚩

मेरी राय :- क्या कमाल हो जाएगा अगर हमारा देश हिंन्दु रा्ष्ट्र बन भी गया तो ! यहां तो हिन्दू हीं हिन्दू का सबसे बड़ा दुश्मन है । हमारे देश का इतिहास रहा है कि हिन्दू राजाओ ने ही दुसरे हिन्दू राजा के राज्य को हड़पने के लिए बाहरी आक्रमणकारियो , मुगलों को , तो अंग्रेजो का साथ दिया और साथ लिया भी । और आज भी देख लो अनेक हिन्दू नेता हिन्दू के हीं खिलाफ हैं ।
 तो भला अगर हमारा देश हिन्दू राष्ट्र बन भी जाएगा मान लीजिए तो क्या हो जाएगा ?

 लोग आपस में हीं मार काट करेंगे और जयचंद बन कर एक दुसरे का नुक़सान करने के लिए घात करेंगे । यहां तक कि जैसा आज हो रहा है कि विदेश में जाकर भारत का अपमान करते हैं और उनसे सहायता मौरल सपोर्ट मांगने का प्रयास करते हैं और कुछ प्रवासी हिन्दू ही बड़े चाव से उनका सुनते हैं और ताली बजाते हैं ।

 आज तो देख हीं रहे हैं न एक नामी खानदानी नेता का वारिस विदेश के धरती पर जाकर देश की बुराई खुलेआम कर रहा है और लोग उसकी पार्टी को बोट देकर स्टेट का बागडोर दे रहे है, ये कौन बोट दे रहा है उनको अधिसंख्यक हिन्दू हीं न ? 

 तो मेरा कहने को मतलव है कि हिन्दू पहले मन से तो हिन्दू बन जाए और हिन्दू विरोधी को बोट देना बंद कर दें । 
 फिर राष्ट्र अपने आप हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा घोषणा कि आवश्यकता नहीं है । अधिसंख्यक हिन्दूओं कि मानसिकता जब तक हिन्दू की नहीं होगी तब तक केबल घोषित करने से कुछ नहीं होगा । कइ क्षेत्र में तो बहुत अच्छी अच्छी बातें घोषित है संविधान में जैसे युनिफर्म सिविल कोड , कानून भी बना हुआ है लेकिन लोगों के सोंच के कारण फिरका परस्त ताकत यहां जमा हुआ है एवं हिन्दूस्तान का खा कर , हिन्दू के टैक्स के पैसे से मौज कर रहा है और उल्टा हिन्दू से बोट लेकर हिन्दू का ही गला काट रहा है । 
इसलिए कहता हूं सबसे पहले मन से हिन्दू बनो , राष्ट्र अपने आप हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा । जातीं में बंटे रहोगे तो आपस में हीं लड़ते रहोगे और दुसरा मौज करेगा वो भी हमारे धन तथा संसाधन पर । इसलिए मानसिक रूप से हिन्दू बिचार धाराओं को आत्मसात् करने का प्रण कर लें । राष्ट्र अपने आप हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा ।

 आप  श्री कृपालु जी महाराज  का विश्व शांति कैसे होगा वाला प्रवचन आप भुल गए लगता है । श्री महाराज जी के इस प्रवचन का सार है कि जबतक जीव यह मन से नहीं मान लें कि भगवान अंदर बैठे हैं और वो सब नोट कर रहे हैं तब तक जीव अशांत रहेगा । 
और जब तक अशांत रहेगा तब तक बुराई समाप्त नहीं हो सकती है , श्री महाराज जी फिर कहते हैं सब के पीछे कानून और पुलिस नहीं खड़ा किया जा सकता है । और पुलिस भी भ्रष्ट न हो इसका गारंटी नहीं है क्योंकि चरित्र यानि अंत:करण को ठीक करना होगा । जब तक चरित्र नहीं ठीक होगा तब तक कानून से कुछ नहीं हो सकता है । 
इसलिए जबतक हिन्दू मन से हिंन्दु फिलोसॉफी को सिद्धांत को आत्मसात नहीं करेगे तब तक सिर्फ हिन्दू राष्ट्र या कुछ भी करने से हिन्दू एकता बेईमानी है । 
आज लोग अपने ही समाज का दुश्मन है । परोसी हिन्दू से बनता नहीं । भाई भाई में बैमनश्य है । अपनी बुढ़ी मां और बाप को बृद्धा आश्रम भेजने वाले तथाकथित हिन्दू से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं ?
अधिसंख्यक हिन्दू न तो अपने चरित्र पर ध्यान दें रहे हैं और न अपने औलाद के चरित्र पर । खुला बिचार ( broad mindness ) के नाम पर आल ओलाद को खुला छूट है , जाकर लिविंग रिलेशन में रहे , भद्दे भद्दे कपड़े पहने । हिन्दू भैल्यूज यानि मूल्य तथा सिद्धांत को ताखा पर रख कर ब्यायफ्रेंड बनावे तो गलत लोग तो फायदा उठाएगा हीं । कानून तो बहुत है पर हो क्या रहा है ? 

भाई भाई से घर में जमीन जायदाद के नाम पर लड़ने वाले , भाई भाई से मन मुटाव तथा मार पीट करने वाले , बाप मतारी को नहीं पुछने वाले , चाचा चाची , ताऊ का सम्मान न करने वाले से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं । क्या घर के अंदर भी आप कानून और पुलिस के द्वारा हिन्दू सिद्धांत और भैल्यूज को मनवाने का सोंचते है क्या ? 
जो लोग आज हिन्दूत्व का वकालत करते हैं उनमें से अधिकतर के घर में क्या हाल है जरा जाकर सर्वे कर लीजिए । 

संजुक्त परिवार में रहना पसंद नहीं , मां वाप , संजुक्त परिवार के प्रति कोई फर्ज नहीं पुरा करने वाले लोग आज हिन्दूत्व कि बातें करते हुए सोसल मिडिया और बाहर भीड़ के सामने बड़ा बड़ा लेक्चर देते पाए जाते हैं । 
इनमें से अधिकतर का परिवार मियां बीबी बच्चा तक भी सीमित नहीं । अच्छे अच्छे पढ़ें लिखे लोग दारू पी कर घर में पत्नी से मार पीट करता पाया जाता है गाली गलौज का तो नाम ही मत लो । बेचारे उनके बच्चे दुबके और डरे रहते हैं । और बेचारे पड़ोसी का तो रात का नींद हराम होता हीं है । और सुबह उठ कर जब नशा टुटता है तो शरीफ का दिखावा करके समाज में हिन्दूत्व पर लेक्चर और सोसल मिडिया पर जय श्री राम बोलने से क्या हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा । 
अरे पहले स्वयं तो हिन्दू फिलौसफी को आत्मसात करो । 

सुपरफिसियल बातें करने से नहीं होगा भाई , पहले सनातन वैदिक धर्म के फिलौसफी को आत्मसात करना होगा ‌! 
मैं आपसे पुछता हूं आप खूद बतलाई की आपके तथा आपके भाई बहन रिस्तेदारो में से कितने के बच्चे इंग्लिश कन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं , जरा ईमानदारी से यह बताएं फिर जाकर हिन्दू राष्ट्र पर भाषण देना , जरा पुरा इमानदारी से कुछ प्रमाण भेजो अपने तथा अपने रिश्तेदारों के बच्चे के स्कूल आइ कार्ड का फोटो डालो । और आप खुद भी किस स्कूल में पढ़े हैं उसका भी फोटो डालिए ।। दारू और शराब पीना तथा मांस खाना हीं गुणाह है सनातन शास्त्रों में , उपर से इंग्लिश दारू पीने वाले हिन्दूत्व कि बातें करते हुए शोभा नहीं देता है । 

भाई जाकर पढो ठीक से अपना इतिहास भारत तो सदा से अखंड हिन्दू राष्ट्र था हीं । वो कौन सा ऐसा बात और कारण है कि बाहर के लोग आकर इसे टुकड़ा टुकड़ा कर दिया और आज यह हाल है तब जाकर आपको समझ में आ जाएगा कि हिन्दूओं का आज ये हाल क्यों है ? 

आज हमारे हिन्दू बाबा जी लोग , धर्मगुरु लोग भिन्न भिन्न पंथ , बिचार धाराओं में बंटे हूए है , आपस में हीं नही‌ बनती एक दुसरे को । कोई लिंगायत है तो कोई वोक्कालिंगा तो कोई फोकालिंगा तो कोई जटालिंगा , तो न जाने क्या क्या , आपस में एक जुटता नहीं, हमारे बहुत से धर्म गुरूओं में आपस में हीं नहीं बनती , भीतर से हम बड़े तो हम बड़े कि भावना है और ऐसे लोगों से हिन्दूस्तान कैसे हिन्दू राष्ट्र बनेगा ? कोई राम और कृष्ण को गाली दे रहा है तो कोई भगवान शंकर को , सुन कर मुझे शर्म आती है और आश्चर्य भी और दुख भी । 

अरे हमारे देश में तो एक हीं गुरू के दो अनुयायीयों का आपस में नही बनती दिखाई देती है , एक दुसरे का सबसे पहले हीं टांग खेचते खुले आम दिखाई देते हैं । और बातें बड़ी बड़ी । जरा सोचिए गहराई से कहा खड़े हैं हमलोग ?? 

पढ़ने और जानने का तो आदत नहीं है न इसलिए ये सुपरफिसियल बातें करते हैं बहुत से लोग । 
वो कहावत है " घर फुटे तो गवांर लुटे "
तो पहले खुद को और अपने घर को ठीक करें , हम सभी हिन्दू अपने को ठीक कर लेंगे तो हमारा देश फिर से अपने आप हिन्दू राष्ट्र के गौरव को पुनर्स्थापित कर लेगा । :- संजीव कुमार।

श्री राधे ।

:- संजीव कुमार

No comments:

Post a Comment