Thursday, 20 July 2023

बिषय भोग का मतलव

बिषय भोग का मतलव :- मनुष्य के पांच स्थूल ज्ञान ईंद्रियां संबंधित बिषयों को भोगने के सुख को बिषय भोग कहते हैं।
जैसे आंख से संसारिक वस्तुओं को देखने का सुख , कान से अपने मन के मुताबिक शब्द को सुनना , उसमें आनंद लेना , जैसे किसी कि बुराई , किसी संसारी की बराई , अपनी बराई , अपना मान सम्मान के शब्द को सुनने का सुख । 
जीभ से तरह तरह के अनावश्यक भोजन का सुख , अनावश्यक व्यंजन को चटकारे लेकर ग्रहण करने का सुख। 
नाक से संसारिक वस्तुओं के सुगंध का सुख , त्वचा से संसारिक वस्तुओं को छुने का सुख , शारीरिक वासनाओं को भोगने का सुख यानि मैथुन । 
इन सब बिषय भोग का नाम है "काम " । 
अत: इन पांचों स्थूल ईंद्रियों के सुख की कामना को काम वासना कहते हैं । 
ये काम वासना जब प्रकृति के नियम और लिमिट के अनुसार होती है तो यह निर्माणकारी है संसार में जीवन चक्र यानि इको सिस्टम के लिए । लेकिन यही जब आवश्यकता से अधिक हो जाए तो बिष बन जाता है , पाप कर्म कहलाते हैं । अपराध को जन्म देता है , जीव के पतन का मुख्य कारण बनता है । 
:- पुज्यनियां रासेश्वरी देवी जी के प्रवचन से ।

No comments:

Post a Comment