हनुमान जी को यह सारी सिद्धियां मिली हुई थी जिसका उपयोग वो भगवान राम के सेवा के लिए हीं किए हमेशा । और हरि जनों के रक्षा के लिए करतें हैं ।
हनुमान जी अपने इन सिद्धियों का दुरूपयोग संसार में किसी भी अनाधिकारी जीव को बिना अच्छे कर्म किए खडाब प्रार्बध को , भाग्य को बदलने के लिए नहीं किए । लेकिन आज कल कुछ लोग उनके नाम पर लाखों लोगों के भाग्य को झूठा आशीर्वाद देकर बदलने के लिए कर रहे हैं जो घृणित है ।
आठों सिद्धियां और नौ निधियां ए हैं ।
1.) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है जैसे तल , अतल , वितल, सुतल, तलातल और पाताल आदि तक । और किसी भी जीव के शरीर में भी प्रवेश कर जाता है । कठोर से कठोर बन जाता है ।
2.) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है। जितना बड़ा बनाना चाहें उतना ।
3.) गरिमा- जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है। कैसी भी भारी बस्तु को उठा सकता है । पेड़ पहाड़ आदि भी उखाड़ सकता है । हाथी को अंतरिक्ष तक फेंक सकता है ।
4.) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है। अनेकों रूप धारण कर सकता है ।
5.) प्राप्ति- जिससे इच्छित माईक पदार्थ की प्राप्ति कर लेता है ।
6.) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है। पानी पर चल सकता है । अंतरिक्ष में उड़ सकता है । किसी भी ग्रह पर जा सकता है ।
7.) ईशित्व- जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है।
8.) वशित्व- जिससे दूसरों को वश में किया जाता है। दूसरे के मन की बात जान लेना आदि ।
ये हैं नवनिधियां -
1. पद्म निधि, 2. महापद्म निधि, 3. नील निधि, 4. मुकुंद निधि, 5. नंद निधि, 6. मकर निधि, 7. कच्छप निधि, 8. शंख निधि और 9. खर्व या मिश्र निधि। माना जाता है कि नव निधियों में केवल खर्व निधि को छोड़कर शेष 8 निधियां पद्मिनी नामक विद्या के सिद्ध होने पर प्राप्त हो जाती हैं, लेकिन इन्हें प्राप्त करना इतना भी सरल नहीं है।
श्री राधे । पद्मिनी नामक विद्या, चौंसठ योगिनी में से एक योगिनी विद्या , पद्मिनी योगिनी साधना से मिलती है । यह साधना भारत में स्थित तीन शक्ति पीठ , १. कामरूपकामख्या मंदीर के क्षेत्र , मालेगांव , गोहाटी , असम २. मां तारापीठ , प. वंगाल तथा , ३. मां रजरप्पा शक्ति पीठ , झारखंड में की जाती है ।
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