Thursday, 20 July 2023

भगवान श्री कृष्ण के " नागर " नाम के भावार्थ को समझते हैं ?

भगवान श्री कृष्ण के " नागर " नाम के भावार्थ को समझते हैं ।
यूं तो किसी नगर को बसाने वाले को या किसी नगर के अधिपति , राजा , अधिक्षक , अध्यक्ष को नागर कहा जाता है जैसे आज मेयर कहते हैं वैसे । 

लेकिन भगवान श्री कृष्ण को रसिक संतों ने नागर इसलिए कहा है कि भगवान ब्रज के रसिकों , नर नारियों , गोप , गोपियों के दिलों का राजा थे , स्वामी थे । अत: वे ब्रजनागर कहलाए ब्रज में । 
भगवान श्री कृष्ण ने दो दो नगर बसाया , पहला गोकुलवासी को कंस के अत्याचार से बचाने के लिए विश्वकर्मा को आदेश देकर नंदगांव बसाया । वहीं दुसरी ओर वो अपने जनों को जरासंध के आक्रमणो से बचाने के लिए द्वारिका नगरी बसाया । 
इसलिए भी वो नागर कहलाए । 

लेकिन उच्च कोटि के रसिक संतों ने उन्हें गोलोक का तथा समस्त ब्रह्मांड के समस्त जीवों का अध्यक्ष बतलाया है । सभी जीवों के जीवन का आधार श्री कृष्ण है । वे माया तथा जीव दोनों का अध्यक्ष हैं, गवर्नर है , स्वामी हैं , पिता हैं । इसलिए उनको नागर नाम दिया है रसिको ने । 
श्री राधे ।:- संजीव कुमार

No comments:

Post a Comment