यूं तो किसी नगर को बसाने वाले को या किसी नगर के अधिपति , राजा , अधिक्षक , अध्यक्ष को नागर कहा जाता है जैसे आज मेयर कहते हैं वैसे ।
लेकिन भगवान श्री कृष्ण को रसिक संतों ने नागर इसलिए कहा है कि भगवान ब्रज के रसिकों , नर नारियों , गोप , गोपियों के दिलों का राजा थे , स्वामी थे । अत: वे ब्रजनागर कहलाए ब्रज में ।
भगवान श्री कृष्ण ने दो दो नगर बसाया , पहला गोकुलवासी को कंस के अत्याचार से बचाने के लिए विश्वकर्मा को आदेश देकर नंदगांव बसाया । वहीं दुसरी ओर वो अपने जनों को जरासंध के आक्रमणो से बचाने के लिए द्वारिका नगरी बसाया ।
इसलिए भी वो नागर कहलाए ।
लेकिन उच्च कोटि के रसिक संतों ने उन्हें गोलोक का तथा समस्त ब्रह्मांड के समस्त जीवों का अध्यक्ष बतलाया है । सभी जीवों के जीवन का आधार श्री कृष्ण है । वे माया तथा जीव दोनों का अध्यक्ष हैं, गवर्नर है , स्वामी हैं , पिता हैं । इसलिए उनको नागर नाम दिया है रसिको ने ।
श्री राधे ।:- संजीव कुमार
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