आपका इंप्लायर या क्लाईंट जितना पैसा आपको देता है आपका कर्तव्य है कि उतने का काम करके जरूर उनका कर्ज जरूर उतारें , वल्कि उनके दिय पैसे ,सैलरी के एवज से अधिक उनका काम कर के दें जिसके लिए वो आपको हायर कियें हैं ।
नहीं तो भगवान के यहां अनावश्यक कर्ज आप पर चढ़ जाता है । हरेक कर्म का हिसाब भगवान के यहां जरूर होता है ।
अगर सैलरी के एवज में कम काम करते हैं तो कर्ज बढ़ता है और फिर अगले जन्म में या इसी जन्म में चुकाना भी पड़ता है ।
कर्म के इस रहस्य को समझना आवश्यक है ।
देखते होंगे , बहुत से लोगों को कि किसी को जी तोड़ मेहनत करना पड़ता है पर उसके एवज में उसको कम पैसा मिल रहा है , बेचारा कहता है हमारा किस्मत खड़ाब है , दुसरे को अधिक मिल रहा है same post पर या same work के लिए और किसी को कम ।
यह इसलिए कि आपने पिछले जन्म में या भूतकाल में इसी जन्म में किसी का काम कम किया और पैसा अधिक लिया ,
तो भगवान की प्रकृति तो हिसाब समय आने पर करेगी हीं । हमें हर हाल में ईमानदार रहना चाहिए अपने संतुष्टी के लिए , सकुन के लिए , संतोष के लिए , अच्छी नींद के लिए , सेहत के लिए आदि ।
अपने इंप्लायर, क्लाईंट , भेंडर ( सप्लायर), कस्टमर्स तथा सबोर्डिनेट में अच्छा ताल मेल बना कर चलें एवं हमेशा निष्पक्ष रहें, विनम्र रहें तथा इगो का त्याग करके चलें ।
जो इस सिद्धांत पर चलतें है वो एक हीं जगह लंबा समय चलते हैं और जरूरत पर भी जाए तो न कभी नौकरी कि कमी होती है और न क्लाईंट की न कस्टमर की । भगवान के घर एप्रऐजल ठीक रहना आवश्यक है , ईश्वर सदा ऐसे का मदद करते हैं । याद रहे हमारा कर्म हमारे हाथ में हैं और हम अपने हीं कर्म के प्रति उत्तरदाई होते हैं हमेशा ।
This is principles of karma
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