उत्तर :- भगवान श्री कृष्ण अनंत ब्राह्मांड के अनंत मायाधीन जीवों को उसके कर्म फल के अनुसार चौरासी लाख योनियों में नचाते रहते हैं । तथा स्वयं मायामुक्त भक्तों के इशारे पर नाचते हैं , उनके पीछे-पीछे डोलते रहते हैं ताकि उनके चरणों धुल उन पर परे । इसलिए वो नटवरों के भी सरदार हैं , नटवरों में श्रेष्ठ है , इसलिए रसिक महापुरूषों ने , गोपियों ने उन्हें नटवर वपु कहा है । श्री राधे ।
अगले पोस्ट में उनके "नागर " और 'नंदा' नाम के भावार्थ का चर्चा करेंगे ।:- संजीव कुमार
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