जिसको हमारा भाव पसंद होता है उनको साधुवाद और जिनको नहीं तो उनकी तरफ देखता कौन है ? उनको विशेष साधुवाद ।
अगर मैं इसका फिक्र करूं तो मुझसे अधिक मुर्ख इस विश्व में कोई नहीं ।
इसलिए कर्म किए जा फल कि इच्छा मत कर रे इंसान यह है गीता का ज्ञान ।
इस संसार में अधिकतर लोग वास्तविक महापुरूषों को तो अच्छा कहा हीं नहीं ! भगवान अवतार लेकर आए , भगवान संत का रूप लेकर आए उन पर भी अधिकांश लोग विश्वास नहीं किया । उनको अच्छा बोला ही नहीं, तो अगर मैं अपेक्षा करूं कि मुझे लोग बढ़िया कहेंगे तो इससे बड़ा हास्यास्पद बात कोई और नहीं ।
:- संजीव कुमार।
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