Thursday, 20 July 2023

फल से आसक्ति विहीन कर्म करने से सफलता मिलती है ।

जब व्यक्ति फल के आसक्ति के बिना कोई कर्म करता है तो कर्मफल कि कोई चिंता नहीं रहती है , हरिगुरू में आसक्ति रखकर कोई भी कर्म कर्मयोग है । इस कर्म को भगवान और गुरू नोट नहीं करते और न कोई उसका फल देते हैं । तो फिर किसी के पसंद या नापसंद का चिंता कौन करे भला ? 

 जिसको हमारा भाव पसंद होता है उनको साधुवाद और जिनको नहीं तो उनकी तरफ देखता कौन है ? उनको विशेष साधुवाद । 
अगर मैं इसका फिक्र करूं तो मुझसे अधिक मुर्ख इस विश्व में कोई नहीं । 
इसलिए कर्म किए जा फल कि इच्छा मत कर रे इंसान यह है गीता का ज्ञान । 
इस संसार में अधिकतर लोग वास्तविक महापुरूषों को तो अच्छा कहा हीं नहीं ! भगवान अवतार लेकर आए , भगवान संत का रूप लेकर आए उन पर भी अधिकांश लोग विश्वास नहीं किया । उनको अच्छा बोला ही नहीं, तो अगर मैं अपेक्षा करूं कि मुझे लोग बढ़िया कहेंगे तो इससे बड़ा हास्यास्पद बात कोई और नहीं । 
:- संजीव कुमार।

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