बड़े बड़े उन डिग्रीधारकों के डिग्रियों का कोई मूल्य नहीं जिनकी भाषा, वाणी, सोंच, चरित्र तथा व्यवहार खड़ाब है , जिनकी बात करने की तमीज और तहजीब गलत है। इनसे तो कहीं अच्छा वो अनपढ़ गंवार और अंगुठा छाप हैं जिसमें नैतिकता , चरित्र, संयमित तथा मर्यादित भाषा, एवं व्यवहार का गुण है ।
जला कर फेंक दिजिए उन डिग्रियों को जिस पर आपको अहंकार है , घमंड है और आप असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हो ।
नहीं चाहिए हमें आपके जैसे डिग्रीधारी लोग ।
काफी पढ़े लिखे होने के बाबजूद भी अगर आपका व्यवहार , वाणी , भाषा सुंदर नहीं है, मर्यादित नहीं है तो आपका डिग्री केवल एक कागज का टुकड़ा भर है जिसका न कोई मूल्य है और न कोई मतलव । :- संजीव कुमार ।
No comments:
Post a Comment