Thursday, 20 July 2023

ये सभी है आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण जीवात्मा । जिसमें चार ने इतिहास रचा है और दो अभी उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं ,

मेरा लेख 24 मई 2022 :- 
These are spiritual powered personalty and Cherismatic leaders of India . 
ये सभी है आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण जीवात्मा । जिसमें चार ने इतिहास रचा है और दो अभी उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं , जो एक नया इतिहास रचने के राह पर अग्रसर हैं । वास्तविक आध्यात्मिक शक्तियों का बल है इनके पीछे । 
इसलिए हमें अपने आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करके इसका पुनर्निर्माण करना हीं होगा । तभी देश मजबूत बनेगा । मंदीरे हमारे आध्यात्मिक विकास का केंद्र बिन्दु है , यह हममें आस्था विश्वास के उपरांत आत्मबल की अभिवृद्धि करता है । 

बिना आध्यात्मिक विकास के भौतिक विकास हमेशा घातक सिद्ध हुआ है और होगा । जैसे परमाणु शक्ति भौतिक विकाश के ऊंचाई का एक उदाहरण है । किन्तु अगर यह ऐसे लोगों के हाथ आ जाए या ऐसे नेतृत्व के हाथ में आ जाए जो आध्यात्मिक रूप से विकसित नहीं है तो इसका दुरूपयोग हीं संभव है । इसलिए लोगों को आध्यात्मिक होना होगा । हमें अपने आध्यात्मिक विरासत को , धरोहरों को इतिहास के गर्त से बाहर निकाल कर उसका जिर्णोद्धार करना हीं होगा । 

जब तक आस्था और विश्वास नहीं रहेगा , देश मजबूत नहीं होगा । आज क्या हाल है यूक्रेन का किसी से छिपा नहीं है । सब तरह से संपन्नता के बाबजूद एक देश बर्बादी के कगार पर खड़ा है । रोजगार व्यापार सब समाप्त क्योंकि रोजगार और व्यापार आदि जिविका का आधार है आस्था और विश्वास ,‌वो जिस प्रकार देश के प्रति आवश्यक है उसी प्रकार आध्यात्मिक विरासत के प्रति भी आवश्यक है । 
अगर हमारे आध्यात्मिक विरासत को पुनर्जीवित नहीं किया गया फिर से , देश से गुलामी के तमाम बदनुमा दाग के निशानियों को नहीं मिटाया गया तब तक हमारा आत्म बल कमजोर हीं रहेगा । और जब आत्मबल कमजोर रहेगा तब लोग वेरोजगार नहीं बेकार हीं रहेंगे । क्योंकि आत्मबल हीं मनुष्य के सफलता का आधार है । 
अपने आध्यात्मिक विरासत तथा संस्कृति के रक्षा का आभाव हममें हीन‌ भावना उत्पन्न करती है जो आत्मबल का क्षय करती है । और आत्मबल से हीन समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता है । इतिहास उठा कर देख लिजिए। मरा हुआ समाज जिसका जमीर मर चुका है उसका विनाश तय होता है । 

जिन्होंने किसी आक्रांताओं के दबाव में किसी भी भय से , या लोभ से या व्यक्तिगत स्वार्थ से कारण या आत्मबल के अभाव में अपना धर्म तक बदल डाला , अपने भैल्यूज के साथ समझौता कर लिया उनको एक बार ह्रदय से सोचना चाहिए । और वापसी करना चाहिए इसी में भलाई है ।  

हम सौ करोड़ के तत्कालीन पुर्वज भी तो उस समय थे , वो भी जूल्मों सितम झेला , दवाब झेला , लेकिन अनेकों ने शहीद तक होना पसंद किया किन्तु अपना धर्म नहीं बदला । हमें अपने पुर्वजों पर नाज है । 

 आपको भी सोचना चाहिए । और अपने मूल विरासत के खिलाफ नहीं जाना चाहिए , सम्मान करना चाहिए , शांति से कल के गलती को सुधारने में मदद करना चाहिए ।
इससे इतिहास में किए गय गलती की भरपाई होगी और तब जाकर भाईचारा स्थापित कर सकेंगे आप , आखिर आपका पुर्वज भी तो हिन्दू हीं थे । इस बात को आप क्यों नहीं स्वीकार कर लेते । सत्य को स्वीकार करने में गर्व हीं तो है । आखिर है तो आप भी हिन्दुस्तानी हीं ।
बस जरूरत है अपनी मूल संस्कृति में वापस लौटने की ।
नहीं तो कम से कम हिन्दुस्तान के मूल विरासत को उसके मूल स्वरूप में फिर से स्थापित करने में आपका भी भला हीं तो है । आप थोड़ा उदार बन जाइए । और लौटा दिजिए उन विरासत को अपने मूल स्वरूपों में । 
आपके पुर्वजों ने जो गलती किए हैं उसका भरपाई आज आप कर लिजिए ,आज मौका है आपके पास । 

" If you will not change , then change will change you "

 कलाम साहब हमेशा‌ भारतीय संतो में श्रद्धा और विश्वास रखा । जिसके पास वास्तविक आध्यात्मिक बल है उसके निश्चय को कोई डिगा नहीं सकता , कोई हरा नहीं सकता । काश इतिहास और वर्तमान से कुछ लोगों को यह समझ में आ जाए । नहीं तो नहीं समझने वाले को हमेशा तो हार का मुख देखना हीं परा है और आगे तो और भी देखेंगे । कम से कम इतिहास तो इसी बात का साक्षी है । जय हिन्द ।:- संजीव कुमार ।

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