Thursday, 20 July 2023

बहुत से ऐसे साधक भी है जिन्होंने उनको प्रत्यक्ष देखा है, सुना है, लेकिन उनको भी डाउट रहता है कि वो कैसे जाने कि श्री महाराज जी , युगल सरकार श्री राधा कृष्ण उनको अपना लिए हैं, अपना मान चुके हैं या नहीं ? वो उनको अपना प्रेम दिय है या नहीं ?

बहुत से ऐसे श्रद्धालु लोग है जिन्होंने श्री महाराज जी का प्रत्यक्ष दर्शन नहीं किया है तथा बहुत से ऐसे साधक भी है जिन्होंने उनको प्रत्यक्ष देखा है, सुना है, लेकिन उनको भी डाउट रहता है कि वो कैसे जाने कि श्री महाराज जी , युगल सरकार श्री राधा कृष्ण उनको अपना लिए हैं, अपना मान चुके हैं या नहीं ? वो उनको अपना प्रेम दिय है या नहीं ? 
तो बड़ा आसान है इन बातों को खुद से जानना अपने ह्रदय को टटोल कर । 
कुछ सवाल का उत्तर आप अपने दिल में ढूंढ़िए आपको उत्तर मिल जाएगा । 

वो प्रश्न है - 
१. क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि आप प्रत्येक क्षण, प्रत्येक दिन, श्री महाराज जी का प्रवचन , उनकी वाणी , उनकी बातें पढ़ें , सुने और देखें तथा उनकी तस्वीरें देखने को हरवक्त लालायित रहते हैं ? 

२. क्या आपको नहीं लगता है कि आप श्री राधाकृष्ण कि युगल छवि हीं अब आपके मन को लुभाने लगा है अब ? आप उन्हें ही सबसे अधिक पसंद करते हैं ?

३. क्या आपको नहीं लगता कि श्री महाराज जी द्वारा प्रकटित पद को सुनें , पद के धून गुणगुणाय ? 

४. क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि आपको केवल श्री महाराज जी , उनका धाम , वृंदावन , बरसाना , प्रेम मंदिर , कृति मंदिर , भक्ति भवन आदि सबसे अधिक लुभाने लगा है ? 

५. क्या आपको नहीं लगता है कि जब भी आप श्री महाराज जी और अम्मा कि छवि देखते हैं , श्री राधाकृष्ण कि छवि देखते हैं तो सबसे अधिक प्रसन्नता होती है ? उनको याद करके आंखें भर जाती है , आंसू छलकने लगते हैं ?

अगर उपर्युक्त पांचों सवाल का उत्तर आपका दिल हां में देता है तो यह पूर्णतया विश्वास कर लीजिए कि श्री महाराज जी आपको अपना लिए हैं और अपने प्रेम का दान आपको कर चुके हैं । 

अब कमी है तो केवल इन बातों को रियलाईज करने का और विभोर होने का । जितना अधिक रियलाईज आपको होगा, प्रेम लता रूपी पेड़ अधिक तेजी से बढ़ेगी , बड़ी होगी आपके ह्रदय रूपी सरोवर में और आपको उतना हीं अधिक प्रेम का प्रत्यक्ष अनुभव अपने आप होगा । 
और यही रियलाईजेशन कि तीव्रता उनका प्रत्यक्ष दर्शन की व्याकुलता को बढ़ाती जाएगी और एक दिन उनके दिव्य युगल स्वरूप का आपको दर्शन हो जाएगा । 

श्री महाराज जी तो हमें प्रेम दान कर चुके हैं , वो अपना काम कर चुके हैं , अब इसे फील करना और उसको बढ़ाने का काम हमारा है , 99% भगवद् प्राप्ति वो हमें करवा चुके हैं , अब केवल 1% वांकि है । और यह 1% हमारे अपने उपर निर्भर करता है अब । 
जिस दिन इस 1% कमी को हम पुरा कर लेंगे भगवद् प्राप्ति हो जाएगी । उनके द्वारा हमारा अंतःकरण यानि मन बुद्धि चित्त तथा इंद्रियां दिव्य बना दिया जाएगा जिसके फलस्वरूप हम उनके वास्तविक स्वरूप को सदा को देख पाएंगे , उनकी सेवा , उनका आनंद हमको मिल जाएगा । 
 इन बातों पर विश्वास है न आपको ? इस कलिकाल में भगवान श्री राधा कृष्ण तथा श्री कृपालु महाप्रभु जैसे परम दिव्य महापुरुष के प्रति आकर्षण, प्रेम , लगाव ह्रदय में उत्पन्न होना कोई साधारण बात नहीं है । यह उनकी कृपा और प्रेम दान का हीं परिणाम है । 
:- आपका संगी संजीव कुमार ।।

No comments:

Post a Comment