जिस मनुष्य का अंत:करण , चरित्र, मन बुद्धि शुद्ध है वो आध्यात्मिक जगत में उच्च कोटि के संत , महापुरुष, दिव्य भगवद् धाम को पसंद करता है तथा उनका हीं अनुगमन तथा संग करना पसंद करता है ।
साथ साथ भौतिक जगत में भी वो मनुष्य व्यक्तिगत तौर पर हमेशा शुद्ध विचार , शुद्ध भाव , शुद्ध चरित्र एवं शुद्ध व्यक्तित्व वाले जीव को अपना दोस्त बनाता है , संग करता है , उसके साथ ही बात-चीत तथा व्यवहार करना पसंद करता है ।
अच्छे लोगों को कुतर्क , उच्छृंखलता , गलत व्यवहार करने वाले गलत संभाषण करने वाले , गलत विचार वाले , गलत पुस्तक पढ़ने वाले , गलत फिल्म देखने वाले तथा गलत आचरण करने वाले एवं गलत आदत पालने वाले लोगों को पसंद करते हुए हम कभी नहीं पाते हैं ।
भले लोग हमेशा उत्तम मानवीय गुणों वाले , दयालु , न्याय प्रिय, कर्तव्यनिष्ठ , ईमानदार , निष्काम भगवद् प्रेमी, प्रकृति संरक्षक तथा भगवान के प्रत्येक भले जीव के प्रति सद्भाव रखने वाले सोंच के होते हैं । ऐसे मनुष्य किसी भी लोभ लालच में नहीं परतें तथा स्वाभिमानी होते हैं । स्वाभिमानी का मतलव अपने आत्मा तथा आत्मा के आत्मा परमात्मा को तथा उनके निज जन महापुरुषों का सम्मान करने वाले से है । भगवान , उनके संत , सत्य तथा धर्म के सेवा के लिए ऐसा मनुष्य हमेशा तत्पर रहते हैं, तथा जरूरत परने पर आवाज उठाते रहते हैं । इनको अपने मान सम्मान तथा अपमान एवं स्वार्थ कि कोई चिंता नहीं होती है ।
जो मनुष्य अनीति , अन्याय , अधर्म अत्याचार को मुक दर्शक बन कर देखता रहता है उससे बड़ा अत्याचारी तथा अन्यायी कोई नहीं इस संसार में । ऐसे लोगों से दुर रहना चाहिए, कायर लोग कभी भक्ति कर हीं नहीं सकता ।
भगवान कि भक्ति करना तो निडर , साहसी तथा अच्छे अंतःकरण , विवेकवान , न्याय प्रिय , सत्य प्रिय, दृढ़ संकल्पित, पढ़े-लिखे और अंधविश्वासों से दुर रहने वाले , श्रद्धावान, बढ़िया चरित्र एवं शूद्ध भाव वाले निष्काम कर्मयोगी मनुष्य का काम है :- गुरूदेव श्री कृपालुजी महाप्रभु जी से प्राप्त ज्ञान के आधार पर लेख ।
No comments:
Post a Comment