यूं तो साधारण अर्थ में नंदबाबा के पुत्र होने के कारण भगवान श्री कृष्ण को नंदा कहा जाता है ।
भगवान श्री कृष्ण परकिया भाव के लीला में पुर्व निर्धारित वात्सल्य भाव के महापुरुषों को वात्सल्य भाव का भक्ति प्रदान करने के लिए एवं उनसे मातृत्व सुख तथा पितृत्व सुख पाने कि लालसा से उनके पुत्र बन कर उनके गोद में अवतरित होते हैं । हर अवतार काल में भगवान अलग अलग महापुरुषों को अपना माता पिता बनाते हैं और उन्हें वात्सल्य भाव का सुख प्रदान करते हैं । भगवान वात्सल्य भाव के अनंत भक्त जीवों को अपने अनंत लीला काल में वात्सल्य सुख प्रदान किए हैं और आगे भी करेंगे । अनंत मन्वंतर में अनंत बार अनंत ब्रज लीला राम लीला आदि हो चुकें हैं और आगे भी होंगे ।
इस दृष्टि से वो विगत ब्रज के लीला में नंद बाबा के पुत्र होने के कारण वे नंदा कहलाए ।
( केवल महाभाव भक्ति का सीट श्री राधा रानी के लिय सदा के लिए रिजर्व है , कोई भी जीव माहाभाव भक्ति श्री राधा रानी का सीट नहीं पा सकता कभी , लेकिन वांकि सभी जीव अनेक भाव भक्ति के अधिकारी है , जो जीव जिस भाव से भगवान की भक्ति करता है वो उस सीट को उसे दे देते हैं , अत: आज तक अनंत जीव नंद , यशोदा , वासुदेव, देवकी , दशरथ , जनक, कौशल्या, कैकई, सुमित्रा , मनसुखा , सुदामा मधुमंगल आदि बन चुके हैं और गोलोक में है और आगे के अवतार में भी अनंत जीव होंगे )
लेकिन तत्वज्ञान कि दृष्टि से सभी जीव भगवान के अंश है, यानि पुत्र हैं । न उनका कोई पिता है न पुत्र हैं न भाई है न बंधु है ।
यहां तक कि भगवान के स्वरूप शक्ति के अंश सभी भगवान और महापुरूष है, यहां तक कि अनंत ब्रह्मांड के अनन्त ब्रह्मा , अनंत विष्णु, अनंत शंकर , अनंत नित्य संत , अनंत नित्य महापुरुष उनके स्वरूप शक्ति के ही अंश है ।
इस दृष्टि से भगवान श्री कृष्ण समस्त आत्माओं के भी आत्मा, परमात्मा, श्री भगवान हैं, एक मात्र स्वामी हैं , पिता है ।
अत: सनातन दृष्टि से समस्त आत्माओं के अर्थात नंद के भी आत्मा को परमात्मा यानि नंदा कहते हैं ।
अत: नंदा का मतलव आनंद का भंडार , आनंद कंद भगवान श्री कृष्ण समस्त नंद को आनंद प्रदान करने वाले एक मात्र नंदा है ।
जो जिस भाव से भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करता है उसको उसी भाव का आनन्द भगवान श्री कृष्ण प्रदान करते हैं ।
श्री राधे ।:- संजीव कुमार।
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