भगवान श्री कृष्ण अपने रूप तथा मुरली के दिव्य धुन से गोप गोपियों , शरणागत भक्त तथा ब्रज के गायों एवं मोर आदि पशु पक्षियों तक के मन को मोड़ कर अर्थात वैराग्य उत्पन्न कराके अपने ही चित्त में स्थिर करके उन्हें सदा प्रेम और आनंद से तृप्त करने वाले सगुण साकार ब्रह्म है । इसलिए उनको रसिक संतों ने "मुरारी" ( मन को मोड़ने वाला, मन को हरने वाला ) कहा है । इसलिए उनको "हरे मुरारी " कहते हैं । और तो और उनके बांसुरी को मुरली भी इसलिए कहा गया है कि वो अपने दिव्य धुन से भक्त के मन में वैराग्य उत्पन्न कराके चित्त को चुरा कर , मोड़ कर भगवान के चित्त में स्थिर कर दे सदा के लिए ।
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