Thursday, 20 July 2023

ब्राह्मण कौन ?

कुछ लोगों ने मुझसे प्रश्न किया है कि आप किनको ब्राह्मण मानते हैं और ब्राह्मण के रूप में किनको आदर के योग्य मानते हैं और मान देते हैं ह्रदय से ? 

मेरा उत्तर :- तो मेरा मानना है कि मैं ब्राह्मण केवल उनको हीं मानता हुं जो भारत के सनातन वैदिक परंपरा एवं भारत के वास्तविक संत परंपरा का न केवल सम्मान करते हैं वल्कि उनके बतलाए मार्गों को अपना कर उस राह पर चलते हैं । जो हमारे देश के मूल जगद्गुरूओं तथा उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि का न केवल ह्रदय से सम्मान करते हैं वल्कि उनमें से किसी भी जगद्गुरु या वास्तविक महापुरूषों को अपना गुरू मान कर पुरे मनो योग से उनके द्वारा बतलाए गए मार्गों का अनुसरण करते हुए अपने जीवन का निर्वहन करते हैं चाहे वो जीव किसी भी जाति और धर्म में क्यूं न जन्म लिया हो । 
सच्चा वैष्णव वहीं है जो भगवान और उनके निज जनों को अपना आदर्श मानते हैं , भगवान के संतो में से किसी एक को अपना गुरू मानते हैं और उनके बतलाए मार्गों पर चलते हैं । 
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हमारे गुरूवर श्री कृपालु जी महाराज जी ने स्पष्ट रूप से हमें बतलाएं हैं कि " उनका सच्चा अनुयाई, समर्पित शिष्य सभी वैष्णव हैं और वास्तविक ब्राह्मण है इनमें से किसी एक को भोजन कराने से वास्तविक ब्रह्मण को भोजन कराने के बराबर हैं । " 
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तो श्री महाराज जी का स्पष्ट रूप से संकेत है कि जन्म से किसी भी जाति को किसी खास जाति का मानना भगवान श्री कृष्ण के उद्घोष तथा वैदिक नियम का विरोधी धारणा है । 
अत: वैदिक नियम के अनुसार जाति का निर्धारण अच्छे और बुरे कर्मो से होना चाहिए। 
यहां अच्छा कर्म का मतलव है दया , करूणा , त्याग , मानवता , क्षमा , सत्य , अहिंसा आदि दैविक गुणायुक्त कर्म से है चाहे वो चमड़ा सिलने वाला मजदूर ही क्यों न हो , अगर उसमें यह गुण है और वो भगवान और उनके संतो के बतलाए मार्ग का अनुसरण करते हुए अपना संसारिक जिम्मेदारी मानवता के हित में निभाते हुए पुरा करता है तो वो सभी कर्मयोग है और ऐसा कर्मयोगी हीं सच्चा वैष्णव हैं । 

वांकी गलत आचरण वाला जीव यथा हिंसा करने वाला जीव , दुसरे किसी भी जीव को या दुसरे मनुष्य को दुख देने वाला जीव, मानवता के खिलाफ काम करने वाला कोई भी मनुष्य चाहे वो ब्राह्मण कुल में या राज घराने में ही जन्म क्यों न लिया हो वो नीच प्रजाति का जीव है । शूद्र है । पापात्मा है । वो न तो ब्राह्मण हो सकता है , न क्षत्रिय और न वैश्य । 
तो हमारे गुरूदेव के बतलाए सिद्धांतों के अनुसार मैं ब्राह्मण या वैष्णव केवल उनको हीं मानता हुं जो भारतीय सनातन वैदिक धर्म के वास्तविक संत परंपरा को न केवल मानते हैं वल्कि उस पर चलते हैं साथ साथ तमाम अंधविश्वासों से खुद को दूर रखते हैं तथा दुसरे का भी मार्ग दर्शन करते हुए सत्य अहिंसा न्याय के मार्ग कर चलने को प्रेरित करते हैं । श्री राधे ।:- संजीव कुमार।

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