Thursday, 20 July 2023

सिद्धियां दो प्रकार कि होती है ।:-

सिद्धियां दो प्रकार कि होती है ।:- 
भौतिक सिद्धियां ( लौकिक सिद्धियां) तथा आध्यात्मिक सिद्धियां( पारलौकिक सिद्धियां ) 
भौतिक सिद्धियां लौकिक जगत की प्राप्ति के लिए होती है । इससे संसार के किसी भी एरिया के उपल्ब्धि को ,लक्ष्य को पाया जाता है । तथा इस सिद्धि के लिए भी साधना यानि पढ़ाई लिखाई, अध्ययन तथा अभ्यास ( प्रैक्टिस) करने कि आवश्यकता होती है । 
ये भौतिक सिद्धियां भी अनेक प्रकार कि होती है जैसे कला के क्षेत्र में गायन विद्या, गीत , संगीत , नृत्य , वाद्य यंत्र बजाना चित्र कला, पाक कला या अन्य किसी भी कला में पारंगत हो जाना यानि सिद्ध हो जाना, यानि दक्ष हो जाना ) शस्त्र में पारंगत जैसे शस्त्र चलाने की सिद्धि जैसे निशाना लगाने में पारंगत, आदि । शास्त्र में पारंगत ,जैसे भौतिक ज्ञान विज्ञान जैसे रसायन शास्त्र, शल्य चिकित्सा, इंजिनियरिंग , शरीर एवं स्वास्थ्य विज्ञान , आयुर्वेद, डौक्टर औफ मेडिसिन, बनस्पति विज्ञान , पशु स्वास्थ एवं शरीर विज्ञान , होम्योपैथी, नैचुरोपैथी , वास्तविक ज्योतिषिए ज्ञान, एस्ट्रोनोमी , मनोविज्ञान , गणित, भूविज्ञान में पारंगत , यानि सिद्ध , यानि निपुण यानि दक्ष आदि । खेलकुद में सिद्धि जैसे क्रिकेट, पहलवानी , कुस्ती, तैराकी , बैडमिंटन तथा अन्य किसी भी प्रकार का खेलकुद में सिद्धि यानि दक्षता हासिल करना । विमान तथा बाहन चलाने में दक्ष यानि सिद्धि प्राप्त करना । कोई सामान बनाने कि दक्षता हासिल करना , लीडर शीप कि कला यानि दक्षता आदि , बोलने की कला , प्रोफेसर , कलेक्टर आदि प्रसाशनिक दक्षता यानी सिद्धि हासिल करना । बुनाई कढ़ाई , खेती , बागवानी, वानिज्य, एकाउंटिंग , बुक कीपिंग आदि कि कला में निपुणता यानि दक्षता आदि सभी भौतिक सिद्धियां है । 

उसी प्रकार आध्यात्मिक सिद्धियां भी होती है जो भगवान , परामात्मा के और संतो के दिव्य सेवा के लिए जीव उनसे हीं प्राप्त करता है । जैसे अणिमा , गरिमा ,‌ लघिमा , महिमा , प्राकंप्य , महान आदि तथा तंत्र-मंत्र , योग आदि जिसे पारलौकिक सिद्धियां भी कहते है । यह पारलौकिक सिद्धियां आध्यात्मिक एरिया के सुख और आनंद कि प्राप्ति के लिए है , जो दिव्यात्मा के सेवा करने तथा उन्हे परमानन्द हासिल करने लिए उच्च कोटि के जीवों को मिलता है साधना के उपरांत । अत: पारलौकिक सिद्धियां प्राप्त करने वाले जीव इन सिद्धियों का दिखावा नहीं करते । इससे भौतिक जगत तथा भौतिक जगत में लिप्त जीवों का कल्याण नहीं किया जा सकता है । इन सिद्धियों से भौतिक बस्तुएं बस्तुएं नहीं मिल सकती , इन सिद्धियों से आध्यात्मिक ज्ञान बल , सुख और आनंद प्राप्त होता है वो भी जब तक भौतिक जगत का जीव साधना करके संसार से वैराग्य तथा आध्यात्मिक ज्ञान न हासिल करले एवं उनका उद्देश्य केवल भगवत सेवा न हो । 

अत: जिसे संसारिक बस्तुएं चाहिए उसको पढ़ाई लिखाई करके भौतिक सिद्धियां , दक्षता , निपुणता हासिल करने का कर्म करना होगा । 
और जिसे कभी न मिटने वाला तथा सदा बढ़ते रहने वाला आध्यात्मिक सुख आनंद परमानंद आदि चाहिए उसे आध्यात्मिक साधना भक्ति करके आध्यात्मिक सिद्धियां यानि सिद्धा भक्ति हासिल करने का उधम करना चाहिए। 

अगर कोई व्यक्ति पारलौकिक सिद्धियों के बल पर किसी जीव को बिना कर्म किए उसके भाग्य को बदल कर कोई भी संसारिक या आध्यात्मिक बस्तु बैठे बैठाए देने का दावा करता है तो वो पुरी तरह से ढोंगी तथा पाखंडी है । 

वो संसार में अंधविश्वासियों के फौज के द्वारा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसा करता है तथा लोगों को गुमराह कर अपने छुपे हुए संसारिक उद्देश्य को पाना चाहता है । 
ऐसे लोग धर्म के नाम पर या शास्त्र के नाम पर , संस्कृति के नाम पर , भाग्य के नाम पर लोगों के आंखों में धुल झोक कर माल टाल यानि जड़ जोडू और जमीन एवं प्रसिद्धि के साथ साथ पौलिटिकल पावर एवं सत्ता हासिल करना चाहता है । ऐसे लोगों का हिडेन एजेंडा यही होता है । अत: ऐसे लोगों के चंगुल से सदा बच के रहना चाहिए। 
ए लोग जन द्रोही ,‌शास्त्र द्रोही , भगवान द्रोही , राष्ट्र द्रोही है अंदर से लेकिन उपर से दिखाता है कि ए इनका सेवक है ,‌दास है । ऐसे लोगों से बच कर रहें :- संजीव कुमार ।

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