Thursday, 20 July 2023

महिलाओं को हनुमान चालिसा पढ़ना वर्जित है या पढ़ सकती है ?

महिलाओं  को हनुमान चालिसा पढ़ना वर्जित है या पढ़ सकती है ?
देखिए किसी भी बात को समझने के लिए तत्वज्ञान पक्का होना चाहिए तथा उस बिषय पर गहराई से चिंतन करिए । आपको ज़बाब स्वत: मिल जाएगा अगर आप सिरियस साधक हैं तो । 
अब आप मेरा उत्तर जानने से पहले आप मुझे बतलाए कि हनुमान चालीसा के लेखक कौन है ? 
आपने उत्तर दिया तुलसीदास जी , बहुत बढ़िया । यानि आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा का लेखक तुलसीदास जी है ।

अब आप स्वयं से चिंतन में यह पुछिए कि
 तुलसीदास जी कौन से मार्ग के उपासक हैं ? 
आपको उत्तर मिला भक्ति मार्ग के यानि दास भाव भक्ति के उपासक है तुलसीदास जी । बहुत बढ़िया । यानि इसका भी उत्तर आप सही सही जानते हैं । 

अब आप यह बतलाए कि तुलसीदास जी ने अपना गुरू किनको माना था ? 
आपने उत्तर दिया :- हनुमान जी को , भेरी गुड । यानि यह भी आपको पता है । 

अब आप खुद से यह प्रश्न करिए कि हनुमान चलीसा में क्या है ? 

तो आपने उत्तर दिया - हनुमान जी के रूप गुण लीला , कृति , यश का वर्णन है , बहुत बढ़िया । यानि अब आप यहां तक जान गई चिंतन के द्वारा कि जब भक्ति मार्ग का उपासक जब भगवान के या अपने गुरू के रूप गुण , लीला यश कृति का गुण गाता है तो वो कौन से मार्ग का अनुसरण करता है ?

आपने उत्तर दिया :- भक्ति मार्ग का , क्योंकि अपने गुरू या ईष्ट या दोनो के रूप गुण लीला यश , कृति का गुण गान करना भजन करना सब भक्ति है । कर्मकांड नहीं ।‌
अब आप श्री महाराज जी द्वारा दिया गया तत्वज्ञान अप्लाई करें यहां कि भक्ति मार्ग में कोई नियम निषेध , कायदा कानून , देश 
काल , धर्म योग्यता , अधिकारित्व की कोई बंदिश और आवश्यकता नहीं है । 

अब आपको स्पष्ट हो गया कि भक्ति मार्ग के उपासक के लिखे पद् भजन कीर्तन चालिसा आदि कर्मकांड नहीं है इसलिए इसे पुरूष , स्त्री , नपुंसक या कोई भी उनका रूपध्यान करके गा सकता है पुकार सकता है । 

एक और उदाहरण :- आदि जगद्गुरु शकंराचार्य जी संन्यास मार्ग का अनुसरण किये थे और दुनिया के लिए एक पक्षीय अद्वैत सिद्धांत का प्रति पादन किए थे । जिसमें बहुत से नियम निषेध कायदा कानून है जो उस मार्ग की साधना करने वाले पर लागु होते हैं ।

पर स्वयं तथा उनकी मां सगुण साकार ब्रह्म श्री कृष्ण का भक्ति किए और वो कुछ भक्ति पद रचे जो हमलोग अपने साधना में गाते हैं भगवान का रूपध्यान करने के लिए और यह हमारे श्री महाराज जी के सभी आश्रमों में भी गाया जाता है दैनिक प्रार्थना में । 

" यमुनानिकटतटस्थितवृन्दावनकानने महारम्ये |
कल्पद्रुमतलभूमौ चरणं चरणोपरिस्थाप्य ||
तिष्ठतं घननीलं स्वतेजसा भासयन्तमिह विश्वम् |
पीताम्बरपरिधानं चन्दनकर्पूरलिप्तसर्वांगम् ||
आकर्णपूर्णनेत्रं कुण्डलयुगमंडितश्रवणम् |
मंदस्मितमुखकमलं सकौस्तुभोदारमणिहारम् ||
वलयांगुलीयकाधानुज्ज्वलयन्तं स्वलंकारान् |
गलविलुलितवनमालं स्वतेजसापास्तकलिकालम् ||
गुंजारवालिकलितमं गुंजापुंजान्विते शिरसि |
भुंजानं सह गोपै: कुंजांतर्वर्तिनं नमत ||
मन्दारपुष्पवासित मंदानिलसेवित परानन्दम् |
मन्दाकिनीयुतपदं नमत महानन्ददं महापुरुषम् ||
सुरभीकृतदिग्वलयं सुरभिशतैरावृत: परित: |
सुरभीतिक्षपणमहासुरभीमं यादवं नमत ||

अत: कहने का तात्पर्य यह कि हम केवल भक्ति मार्ग के अनुकूल पद को हीं अपनाते हैं लेकिन अन्य मार्ग का नहीं ।
तो सिद्ध हुआ की तुलसीदास, सुरदास , रै दास , रविदास , मीरा आदि भक्ति मार्ग के भजन कीर्तन को कोई भी जीव गाने का अधिकारी है । 
लेकिन अगर आप किसी कर्मकांड मार्ग के महापुरुषों के मार्ग को अपनाते हैं तो वहां का कर्मकांड संबंधित नियम निषेधों , कायदा , कानून अधिकारित्व का पालन करना होगा । 

देखिये अगर आप श्री महाराज के अनुयाई हैं तो अंत में यही प्रार्थना करना चाहुंगा की हमे हर रोज कम से कम दो घंटा रूपध्यान करते हुए एकांत में उनके लिखे प्रेम रस मदिरा में सिद्धांत माधुरी , रूप माधुरी , लीला माधुरी , दैन्य भाव वाला कीर्तन भजन के साथ करने पर विशेष बल तथा खाली समय में केवल उनके लिखे सिद्धांतों पर चिंतन मनन गहराई से प्रतिदिन करना चाहिए।
अगर ऐसा करते हैं तो हमारे आपके हरेक प्रश्नों का समाधान श्री महाराज जी चिंतन के माध्यम से हमारे मस्तिष्क में उत्तर के रूप में स्वयं प्रकाशित कर देतें हैं , बिषय कोई भी हो वो डाईरेक्ट आज भी अपने साधकों के प्रश्नों का उत्तर स्वयं दे देते हैं और भूले हुए सिद्धांतों को हमारे मस्तिष्क में उभार भी देते हैं । 
कमी हमारे में हैं जो ऐसा नहीं करते वो भटक जाते हैं भूल जाते हैं । जितना अधिक रूपध्यान साधना आप करेंगें , जितना अधिक तत्वज्ञान पर , सिद्धांत ज्ञान पर चिंतन करेंगे उतना अधिक गुरू का मार्गदर्शन , उनका कृपा , उनके प्रेम की अनुभूति आपको होगी । 
कोई नया जिज्ञासु जिज्ञासा भाव से कोई प्रश्न पुछेगा तो आप श्री महाराज जी के हीं कृपा बल से ठीक ठीक उत्तर दे सकेंगे और उन्हें भी श्री महाराज जी से जोर सकेंगे । 
मानिए मेरी बात एक बार और अगर नहीं तो हमेशा कन्फ्यूजन होगा , हरेक बिषय में । 
श्री राधे ।

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