शरीर रूपी गुलदस्ते का आत्मा रूपी फुल परमात्मा रूपी सुंगध को जब प्राप्त कर लेता है तो उसको माया से मुक्ति मिल जाती है
फिर वो संसारिक सुख दुख से परे हो जाता है और सदा आनंद में हीं रमण करने वाला अमिट महाचेतना बन जाता है गुरू कृपा द्वारा ।
तब असली जीवन प्रारंभ होता है और तब वो इस बात को प्रत्यक्ष देख पाता है कि आनंद प्राप्ति से पहले उसने जो जीवन जिया है वो जीवन नहीं एक साधन मात्र था अपने अंशी भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त करने के लिए , जिसके अधिकांश समय को उसने व्यर्थ कि प्राप्ति तथा उसके उपभोग में गवां दिया था । लेकिन गुरू ने उसे संभाल लिया और अपने कृपा द्वारा उसके जीवन को सार्थक कर दिया । वो गुरू ऋण से कभी ऊऋण नहीं हो सकता । क्योंकि गुरू ने उसे पारस बना दिया है । श्री राधे ।:- संजीव कुमार
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