Thursday, 20 July 2023

जीव का शरीर मिट्टी के गुलदस्ता के समान है पर उसमें रखा गया फुल आत्मा का प्रतिक है। आत्मा गुलदस्ता नहीं,आत्मा परमात्मा का फुल है ।

जीव का शरीर मिट्टी के गुलदस्ता के समान है पर उसमें रखा गया फुल आत्मा का प्रतिक है। आत्मा गुलदस्ता नहीं,आत्मा परमात्मा का फुल है । आत्मा अजन्मा है अशेष है , जन्म और मृत्यु से परे है । जो मनुष्य स्वयं को शरीर नहीं आत्मा मानता है और अपने अंशी भगवान श्री कृष्ण को अपना परम पिता परमात्मा मानता है उसे संसार का सुख दुख कभी विचलित नहीं कर सकता ।

शरीर रूपी गुलदस्ते का आत्मा रूपी फुल परमात्मा रूपी सुंगध को जब प्राप्त कर लेता है तो उसको माया से मुक्ति मिल जाती है 
फिर वो संसारिक सुख दुख से परे हो जाता है और सदा आनंद में हीं रमण करने वाला अमिट महाचेतना बन जाता है गुरू कृपा द्वारा ।
तब असली जीवन प्रारंभ होता है और तब वो इस बात को प्रत्यक्ष देख पाता है कि आनंद प्राप्ति से पहले उसने जो जीवन जिया है वो जीवन नहीं एक साधन मात्र था अपने अंशी भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त करने के लिए , जिसके अधिकांश समय को उसने व्यर्थ कि प्राप्ति तथा उसके उपभोग में गवां दिया था । लेकिन गुरू ने उसे संभाल लिया और अपने कृपा द्वारा उसके जीवन को सार्थक कर दिया । वो गुरू ऋण से कभी ऊऋण नहीं हो सकता । क्योंकि गुरू ने उसे पारस बना दिया है । श्री राधे ।:- संजीव कुमार 

No comments:

Post a Comment