Thursday, 20 July 2023

जब किसी जीव के पुण्य का उदय होता है और फिर किसी वास्तविक महापुरूष की कृपा होती है तो पांच बातें होती हैं ।

पुज्यनियां रासेश्वरी देवी जी के इस प्रवचन के सार से हमें खुद को देखना होगा कि हम किस अवस्था में पहुंचे हैं अबतक ! 
देखिये जब किसी जीव के पुण्य का उदय होता है और फिर किसी वास्तविक महापुरूष की कृपा होती है तो पांच बातें होती हैं । 
पहली - जीव के मन में भगवान और महापुरूष को जानने कि जिज्ञासा ( उत्कंठा) पैदा होती है। वो महापुरुषों के पास खींचा चला आता है उत्सुकतावश और फिर वो तीन काम करता है । महापुरुषों का संग करना, उनकी वाणी को बार-बार सुनना, समझने का प्रयास करना तथा उनकी पुस्तकों का अध्ययन करना । इसे सत्संग कहते हैं ।

दुसरी बातें - उनके सिद्धांतों का बार बार चिंतन करना तथा अपने जीवन में लागु करने का निरंतर प्रयास करना । 

तीसरी बातें- उनमें श्रद्धा विश्वास एवं अनुराग पैदा होना । 

चौथी बातें :- उनको अपना मानना , उनको अपना सर्वस्व मानना तथा स्वयं को शरेंडर कर देना उनके सामने मन से तो फिर 
उनके प्रति ह्रदय में प्रेम उत्पन्न होने लगता है स्वाभाविक तौर पर । 

पांचवी बातें :- यहां जब जीव पहुंचता है साधना करते करते तो तब उसके ह्रदय में अपने गुरू और ईष्ट के प्रति श्रद्धा एवं विश्वास प्रगाढ़ हो जाती है । तथा अब उसे यह हर पल इस बात का रियलाईजेशन ( महसूस) होने लगता है कि गुरू एक स्थूल शरीर नहीं है वो परम पिता भगवान श्री कृष्ण का हीं स्वरूप है । भगवान और गुरू में कोई अंतर नहीं । यही वो उच्च अवस्था है जब साधक अपने असली साधना का शुभारंभ करता है ( साधक उच्च साधना के कक्षा में पहुंच जाता है )। 

ऐसी अवस्था में पहुंच कर जीव को अपने गुरू के जीवंत स्वरूप का रूपध्यान होने लगता है । तत्पश्चात जीव को इस बात का दृढ़ता से रियलाईजेशन ( महसूस , अनुभव को रियलाईजेशन कहते हैं ) होने लगता है कि हर पल उसका गुरू उसके साथ है , उसकी रक्षा कर रहा है ,उसका योगक्षेम वहन कर रहा है । फिर जीव जैसे जैसे और आगे बढ़ता है उसको और स्पष्टता से अपने ह्रदय में हर समय गुरू और ईष्ट के उपस्थिति का और अधिक अनुभव होने लगता है । उनसे मिलने कि छटपटाहट , बेचैनी , व्याकुलता बढ़ने लगती है , संसार से वैराग्य और हरिगुरू से प्रेम बढ़ने लगता है । यहां जीव का पंचकोष, पंचक्लेश, त्रिविध ताप , अभिनिवेश मिटने लगता है । 
यही क्रम आगे बढ़ते बढ़ते किसी भी क्षण जीव को भगवद् प्राप्ति करा दिया जाता है गुरू द्वारा। :- पुज्यनियां रासेश्वरी देवी जी ।

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