Friday, 21 July 2023
एक वास्तविक शिष्य कि सबसे बड़ी खुशी ।
एक वास्तविक शिष्य को सबसे बड़ी खुशी और सुख उस समय महसूस होता है जब कोई जीव उसके गुरू और ईंष्ट से प्रेम करना शुरू कर देता है , उसके गुरू और ईष्ट का तारीफ करता है , गुण गाता है ह्रदय से । वास्तविक भक्त तो वहीं है जो खुद तो अपने ईष्ट और गुरू से अनन्य प्रेम करता ही है और दुसरे को भी उनसे प्रेम करने के लिए प्रेरित करता हो , उसे अपने गुरू से मिलवाने के लिए भागिरथ प्रयास करता रहे , स्वयं निराश कभी न हो और दुसरे को भी हमेशा प्रेरणा दे , उस मार्ग पर चलने के लिए दुसरे का हमेशा सहयोग करे । दुसरे को उस दिशा में आगे बढ़ता देख खुश हो , हमेशा दुसरे को मान दे , हौसला बढ़ावे , अपने गुरू और ईष्ट का बात बतावे, किसी का अपमान न करें , कोई दुर्भावना न करें कभी किसी से , हरि और गुरू अपने ऐसे शिष्यों से बहुत खुश होते हैं तथा और अधिक कृपा करते रहते हैं उस पर :- पुज्यनियां रासेश्वरी देवी जी ( भक्ति पियुष से ) । ।
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