Thursday, 20 July 2023

इस बात पर आज बहस है कि हनुमान जी को ,‌ शनि देव के विग्रहों को स्त्रियां छू सकती है या नहीं ??

श्री महाराज जी के द्वारा समन्वय तथा समाधान पर आधारित लेख :- 
इस बात पर आज बहस है कि हनुमान जी को ,‌ शनि देव के विग्रहों को स्त्रियां छू सकती है या नहीं ??
श्री महाराज जी ने एक साधक के ऐसे हीं प्रश्नों का उत्तर देते हुए समाधान दिए थे तथा समन्वय किये थे ।
देखिए एक है भक्ति मार्ग जहां कोई नियम और निषेध नहीं है वहीं कर्मकांड यानि पुजा पाठ यज्ञ हवन आदि में बहुत से कड़े कड़े नियम और बड़े बड़े निषेध है जिसका पालन आवश्यक है । नियम का उलंघन हुआ , दंड मिलेगा । 
नंबर दो - भक्ति मार्ग में जीव स्वयं को आत्मा मानता है देह नहीं , अब तत्वज्ञान कि दृष्टि से आत्मा न पुरूष है , न स्त्री और न नपुंसक । 
अत: भक्ति मार्ग से जाने वाले किसी भी जीव पर कर्मकांड मार्ग के किसी भी नियमों और निषेधों को मानने तथा पालन करने की कोई आवश्यकता नहीं है । 
भक्ति मार्ग के जीव को केवल भक्ति मार्ग के एक हीं नियम का पालन करना होता है कि वो आत्मा है, देह नहीं और हमेशा अपने ईष्ट में हीं मन को समर्पित करना है यानि अपने गुरू और ईष्ट की हीं शरणागति करनी है , सेवा करनी है तथा निषेध यह है कि अपने ईष्ट और गुरू को एक पल के लिए भी नहीं भुलना है एवं अनन्यता का पालन करना है और कुछ नहीं । 

तो सिद्ध होता है कि भक्ति मार्ग के जीव चाहे वो स्त्री हो या पुरूष या नपुंसक सभी को अपने ईष्ट के विग्रह को छुने से , उनकी सेवा करने से कोई मनाहीं नहीं है वेदांत में । 

लेकिन अगर कोई पुजा , पाठी , जपी तपी , यज्ञ हवन, आदि कर्म कांड मार्ग को अपनाता है तो उसको कर्मकांड संबंधित बड़े बड़े तथा कड़े कड़े नियमों का पालन आवश्य करना होगा । 
इस प्रकार कर्मकांड मार्ग के जीव को अगर कर्मकांड मार्ग के सभी नियमों और निषेधों को मानना परम आवश्यक है । अत: कर्मकांड मार्ग में शरीर अगर स्त्री है तो उसको श्री हनुमान जी के विग्रह को छुना बिधि निषेध के अंतर्गत आता है । 

कर्म कांड मार्ग में कोई स्त्री अगर हनुमान जी , शनि देवता आदि के मंदिर में जाकर उनके विग्रह को छूती है तो उसे इस अपराध का दंड मिलेगा , कर्मकांड के कर्म बिधिनिषेध के कानून के अनुसार । 

वेदों में एक लाख श्लोक है इसमें से अस्सी हजार कर्म कांड , ज्ञान योग , कर्म धर्म आदि के बारे में है , इसके नियम और निषेध आदि है पुराणों में जिसे किसी भी कर्मकांडी को मानना आवश्यक है । 

और केवल बीस हजार श्लोक वेद वेदांतों में भक्ति मार्ग का है जिसमें तत्वज्ञान है । इसमें कोई नियम निषेध है । 
हालांकि प्रत्येक जीव भक्ति मार्ग का अधिकारी है चाहे वो स्त्री हो या पुरुष या नंपुसक। इस मार्ग के जीव पर कर्मकांड मार्ग का कोई भी नियम और निषेध लागु नहीं होता है । भक्ति मार्ग का अनुसरण करने वाला चाहे वो स्त्री हो , पुरूष हो या नपुंसक वो अपने ईष्ट के विग्रह को छू सकता है , उनकी सेवा कर सकता है सकती है ।
झगड़ा खत्म । 
श्री राधे ।:- संजीव कुमार 

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