बेमुरव्वत है बड़ा बेईमान है ये,
जिसने लूटा है , मेरा दिलों जान है ये,
बंद आंखों से काजल को चुरा लेता है,
धड़कते सीने से धड़कन को चुरा लेता है,
बड़ा भोला है, और बनता बड़ा अनजान हैं ये
मेरा कान्हा है ए , मेरा जी जान है ये
बेमुरव्वत है बड़ा बेइमान है ये,
जिसने लूटा है मेरा जी जान है ये
हर समय करता बड़ा परेशान हैं ये ।
क्या कहुं , कितना बड़ा शैतान है ये
हर समय करता बड़ा परेशान हैं ये
मेरा कान्हा है ए , मेरा जी जान है ये
रखता है निगाहें अपनी, हर समय मुझ पर
और पुछूं तो बनता बड़ा अंजान है ये
मेरा कान्हा है ए मेरा जी जान है ये
फुलों से खुशबु बहारों से रंग चुरा लेता है
चांद से चांदनी,सितारों से रौशनी को चुरा लेता है
बेमुरव्वत है बड़ा बेइमान है ये,
जिसने लूटा है मेरा जी जान है ये
मेरा कान्हा है ए , मेरा जी जान है ये
हर समय करता बड़ा परेशान हैं ये ।
भोली सुरत पे न जाना इसके
आंखों में मस्ती , हंसी में कयामत है इसके
काली जुल्फों से कयामत की अदा रखता है
मोहिनी सूरत में जादू का असर रखता है
इससे पहले कि क़यामत आय
गोद में अपनी उठा लेता है
बचा लेता है भवर से भव सागर के
डूबा देता है गोलोक के गहरे सागर में
बेमुरव्वत है बड़ा बेइमान है ये,
जिसने लूटा है मेरा जी जान है ये
मेरा कान्हा है ए , मेरा जी जान है ये
हर समय करता बड़ा परेशान हैं ये ।
:- मेरे लिखे गजल का कुछ हिस्सा, संजीव कुमार
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